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Thursday 8th of March 2018 | महिला सशक्तिकरण की मिसाल

महिला दिवस विशेष में:- अवनि चतुर्वेदी


आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है यानी 8 मार्च, वर्षों से महिलाओं के सशक्तिकरण, उनके सम्मान . और समाज में बराबरी का स्थान दिलाने के लिए यह दिवस मनाया जा रहा है, और हमारे देश में बहत हद तक महिलाओं की स्थिति में सुधार भी आया है, आज देश का कोई ऐसा क्षेत्र नही है जहाँ महिलायों ने अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज न कराइ हो.

ऐसी ही एक लड़की जिसने लड़ाकू विमान अकेले चलाकर लड़कियों के बारे में समाज की सभी भ्रान्तियों को तोड़ दिया है, मध्यप्रदेश के रीवा शहर की रहने वाली अवनि का नाम आज पूरे देश की युवाओं के नाम पर है हर कोई उनके जज्बे को सलाम कर रहा है, इसीलिए महिला दिवस में उनका नाम लेना जरुरी हो जाता है

जन्म और पढाई- लिखाई

अवनी का जन्म 27 अक्टूबर 1993, को म.प्र. के रीवा शहर में हुआ था , पिता दिनकर चतुर्वेदी  जल संसाधन विभाग में सरकारी इंजिनियर है,माँ सविता चतुर्वेदी गृहणी है, इनकी प्रारंभिक पढाई शहडोल के देवलोद में हुई , बचपन से  और उच्च शिक्षा इन्होने राजस्थान के विद्यापीठ कॉलेज से की है ,जहाँ अवनि ने इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की. अवनी के भाई सेना में ऑफिसर है, भाई की वर्दी और उनका अनुशासन भी बहुत हद तक अवनी को सेना में भेजने के लिए जिम्मेदार बना.

हॉबी

पढाई के साथ साथ अवनि को पेटिंग का बहुत शौक था, अपनी पढाई के दौरान अवनि ने पेंटिंग में भी खूम हाथ आजमाया, पेंटिंग उन्हें इस तरह भाया की उन्होंने इसी में अपना कैरियर बनाने का मन बना लिया था, आज भी उनके घर में पेंटिंग्स का अच्छा खासा कलेक्शन देखने को मिलता है.

सेना में भर्ती और उड़ान

ग्रेजुएशन के बाद सेना की भर्ती परीक्षा पास की और चालू हुआ सफ़र अपने सपनों की उड़ान भरने की. १८ जून को अवनी सहित तीन लड़कियों मोहिना सिंह, भावना कान्त का चयन किया फाइटर पायलट ट्रेनिंग के लिए. हैदराबाद मके ट्रेनिग सेंटर में  2 साल की कड़ी प्रशिक्षण के बाद परीक्षा की घडी आ गई, जब तीन महिला पायलटों में अवनि का चयन किया गया विमान उड़ाने के लिए , और 19 फरवरी की सुबह गुजरात के जामनगर एयर बेस से अवनी अकेले ही फाइटर प्लेन मिग २१ बायसन ,जिसकी गति आवाज़ से भी अधिक थी, उड़ाने लगी. देश की लड़की ने हवाओं आधे घंटे तक अपनी सफलता की उड़ान भरती रही.

आज अवनि देश की सभी युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं देश की बेटियों के लिए इससे अच्छा सन्देश क्या हो सकता है की आज देश की ही बेटी लाड़ाकू विमान तक उड़ा रही हैं अब शायद ही कोई एसा क्षेत्र होगा , जिसमे देश की बेटियों में अपनी मज़बूत दस्तक न दी हो, 21 वीं सदी के भारत के लिए आज बहुत ही हर्ष और गर्व का दिन है की आज हम महिलाओं के शौर्य और उनके जज्बे की बात कर रहे है.         


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