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Friday 9th of March 2018 | खुद मंत्री के दिए हुए आंकड़ें हैं

कुपोषण मामले में प्रदेश सरकार फेल


2003 में सत्ता सौपते समय मप्र की जनता की आँखों में उम्मीदें साफ़ झलक रही थी. अनुमान था की प्रदेश भयमुक्त, बेरोजगारी मुक्त, कुपोषण मुक्त होगा और ऐसा हुआ भी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में में काम किये लेकिन फिर दूसरे और तीसरे कार्यकाल तक आते-आते जो आंकड़े आने लगे वो जनता को अब कतई गवारा नहीं है.अपराधों में आगे,बलात्कार में आगे और अब कुपोषण के आंकड़ों ने वर्तमान शिवराज सरकार की पोल खोल दी है.

मध्य प्रदेश में हर रोज 92 बच्चों की मौत कुपोषण के चलते होती है. यह जानकारी मध्य प्रदेश विधानसभा में स्वयं प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस ने एक प्रश्न के जवाब में दी है. विधानसभा में एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने स्वीकारा कि प्रदेश में कुपोषण से रोज मरने वाले बच्चों की संख्या 92 हो गई है. 2016 में यह आंकड़ा 74 था.

आंकड़े जनवरी 2018 के -

महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों में जनवरी 2016 से जनवरी 2018 तक करीब 57,000 बच्चों ने कुपोषण के चलते दम तोड़ दिया. इस बीच, 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2017 के बीच 396 दिनों में 5 वर्ष तक के मृत बच्चों की संख्या 28,948 रही, जबकि 6 से 12 वर्ष के 462 बच्चों की मौत हुई. इस तरह इस अवधि में कुल 29,410 बच्चों की मौत हुई. इस तरह औसतन प्रतिदिन 74 बच्चों की मौत हुई.

तो वहीं, अप्रैल 2017 से सितंबर 2017 के बीच के 183 दिनों में 1 वर्ष तक के 13,843 बच्चे कुपोषण के चलते काल के गाल में समा गए. 1 से 5 वर्ष के 3,055 बच्चों की मौत हुई. इस तरह कुल 16,898 बच्चों की मृत्यु हुई. 183 दिन में औसतन प्रतिदिन 92 बच्चों की मृत्यु हुई.

वहीं, ताजा आंकड़े अक्टूबर 2017 से जनवरी 2018 के बीच के 123 दिनों के हैं. इस अवधि में 0 से 1 वर्ष तक के मृत बच्चों की संख्या 9,124 थी. तो वहीं, 1 से 5 वर्ष की उम्र के बीच वाले 2,215 बच्चों की मौत हो गई. यानी कि कुल 11,339 बच्चों की मृत्यु हुई. जिसका प्रतिदिन औसत 92 निकलता है.

जहां, 1 जनवरी 2017 तक के आंकड़े बताते हैं कि उस समय तक 70,60,320 बच्चों का प्रदेश में वजन किया गया. जिनमें से 56,13,327 बच्चे सामान्य वजन के थे. 12 लाख 84 हजार 36 कम वजन के पाए गए और 1 लाख 62 हजार 957 बच्चे अतिकुपोषित मिले. कुल 14 लाख 46 हजार 993 बच्चे कुपोषित थे.

तो फरवरी 2017 में वजन किए गए 71,35,036 में से 14,17,800 बच्चे कुपोषित पाए गए. इस दौरान भले ही संख्या में कमी दर्ज की गई. लेकिन दिसंबर 2017 में तौले गए 69,84,872 बच्चों में भी 14 लाख के ऊपर कुपोषित बच्चे मिले. गौरतलब है कि इस दौरान 2 लाख कम बच्चों का वजन किया गया.

सरकार कुपोषण से लड़ने में हर मोर्चे पर फेल हुई है और विधानसभा में खुद मंत्री द्वारा जारी किये गये आंकड़े सरकार को कटघरे में खड़ा करते हैं .आखिर क्यों सरकार कुपोषण जैसा मुद्दे पर फेल हो रही क्या डिजिटल क्रांति की दौड़ में भूख से बच्चों को मरने के लिए छोड़ दिया गया है.

सितंबर 2016 में प्रदेश के श्योपुर जिले जिसे ‘भारत का इथोपिया’ भी कहा जाता है, में कुपोषण के चलते 116 बच्चों की मौत हुई थी तो प्रदेश सरकार ने इस संबंध में श्वेत-पत्र लाने की घोषणआ की थी. लेकिन, प्रदेश की शिवराज सरकार कुपोषण को लेकर कितनी गंभीर है, यह इस बात से पता चलता है कि अब तक इस गंभीर मसले पर श्वेत-पत्र नहीं लाया जा सका है.

आंकड़े मप्र. सरकार पर कई सवाल खड़े करती है विधानसभा में जब ये आंकड़े प्रस्तुत हुए होंगे उस वक्त आंकड़े प्रस्तुत करते समय स्वयं मंत्री अर्चना चिटनिस के क्या भाव रहे होंगे क्योंकी आंकड़े डरा देने वाले हैं .आज आधुनिकता के इस दौर में एक बार फिर मप्र को कुपोषण ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है.

 


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