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बिहार के रास्ते हमेशा दिल्ली में सत्ता के साथ रहते हैं


रामविलास पासवान और उनकी प्राइवेट लिमिटेड पार्टी लोजपा(लोकजन शक्ति पार्टी). रामविलास पासवान से तो आप बखूबी परिचित होंगे.परिचित इसलिए भी होंगे क्युकी इन्हें हमेशा सत्ता के करीब मंत्री पद में रहते हुए लम्बा समय हो गया है.UPA हो या NDA  रामविलास जी और उनका दल आराम से एडजस्ट कर लेता है और लोजपा कब और कैसे गुलाटी मारेगी इसका अंदाजा शुरू में लगाना मुश्किल रहता है लेकिन जिस किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन करते हैं उस पार्टी को ये भी पता रहता है की यह गठबंधन लम्बे समय के लिए नहीं लेकिन जब तक सरकार है पासवान रहेंगे लेकिन जहाँ कुछ ऐसा लगा की सरकार के दिन ठीक नहीं चल रहे पासवान पलती मार कर सिद्धांतों का पहाड़ा सुना देंगे.

आइये थोड़ा जान ले पासवान जी को पास से-

लोक जनशक्‍ति पार्टी के अध्‍यक्ष राम विलास पासवान का जन्‍म 5 जुलाई 1946 के दिन बिहार के खगरिया जिले में एक दलित परिवार में हुआ था. पासवान ने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झांसी से एम.ए. तथा पटना यूनिवर्सिटी से एलएलबी किया है. 1969 में पहली बार पासवान बिहार के राज्‍यसभा चुनावों में संयुक्‍त सोशलिस्‍ट पार्टी के उम्‍मीदवार के रूप निर्वाचित हुए. 1977 में छठी लोकसभा में पासवान जनता पार्टी के उम्‍मीदवार के रूप में निर्वाचित हुए. 1982 में हुए लोकसभा चुनाव पासवान दूसरी बार विजयी रहे.  1983 में उन्‍होंने दलितों के उत्‍थान के लिए दलित सेना का गठन किया. तथा 1989 में नवीं लोकसभा में तीसरी बार लोकसभा में चुने गए. 1996 में दसवीं लोकसभा में वे निर्वाचित हुए. 2000 में पासवान ने जनता दल यूनाइटेड से अलग होकर लोक जनशक्‍ति पार्टी का गठन किया. बारहवीं, तेरहवीं और चौदहवीं लोकसभा में भी वे विजयी रहे. अगस्‍त 2010 में बिहार राज्‍यसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए और कार्मिक तथा पेंशन मामले और ग्रामीण विकास समिति के सदस्‍य बनाए गए.

मंत्री तो रहते ही हैं पासवान-

रामविलास पासवान NDA गठबंधन में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में 1996-98 तक रेल मंत्री रहे और फिर 1998-2000 तक सूचना एवं प्रसारण मंत्री और 2001-2002 तक केन्द्रीय खनिज एवं  रहे.UPA सरकार में भी अपने आप को एडजस्ट करके मंत्री बन गये और अब फिर एक बार NDA में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में धनवान विभाग उपभोक्ता मामलात मंत्री के मंत्री के रूप में हैं.

दलितों के नाम पर राजनीति-

रामविलास पासवान दलितों के नाम पर राजनीति में मजबूत पकड़ रखते हैं .क्षेत्रीय समीकरण को समझते हुए केंद्र में अच्छे मंत्री पद का जुगाड़ कर लेते हैं.लोक जनशक्ति पार्टी में रामविलास पासवान और उनके पूरे परिवार का कब्ज़ा है. रामविलास पासवान के बेटे चिराग पासवान भी लोकसभा 2014 में चुनाव जीतकर आये हैं.दलितों में अच्छी पकड़ और बिहार की राजनीति में मजबूत हस्तक्षेप के कारण केंद्र में दखल देने में सफल रहते हैं पासवान साहब.

अब फिर NDA छोड़ने के फिराक में-

वर्तमान सरकार में रामविलास पासवान की पार्टी लोजपा NDA की सहयोगी है लेकिन अब फिर एक बार रामविलास पासवान ऐसा लगता है पलटने वाले हैं. बिहार और यूपी के उपचुनाव में NDA की हार के बाद भा सीटों पर हुए उपचुनाव में बीजेपी की हार के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में मतभेद के स्वर सुनाई देने लगे हैं. एक तरफ चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी और बिहार में जीतन राम मांझी की पार्टी हम ने पल्ला झाड़ा तो दूसरी ओर लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के सुर भी बदलते जा रहे हैं.अब देखना यह है की क्या रामविलास पासवान के दिमाग में गठबंधन से अलग होने की बात चल रही है क्या ?अगर ऐसा होता है तो फिर 2019 के चुनाव में लोजपा  UPA में शामिल हो जाएगी.


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