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Friday 23rd of March 2018 | दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा से लौटकर

नर्मदे हर के साथ धर्म से ऊपर एक परिक्रमा...


30 सितम्बर 2017 से शुरू हुई दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा अब समापन की ओर बढ़ रही है.जब से दिग्विजय सिंह ने नर्मदा परिक्रमा यात्रा शुरू की सियासी गलियारों से लेकर धार्मिक मंच ने बड़े कौतुहल के साथ समझना चाहा की आखिर यात्रा का मूल क्या है?  आखिर नर्मदा परिक्रमा क्यूँ?  मप्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा सेवा यात्रा का आयोजन किया था, शिवराज सिंह बीच-बीच में यात्रा में शामिल होते थे लेकिन दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा में लगातार चल रहे हैं. भोपाल से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारों में नर्मदा परिक्रमा के शुरुआत के दिनों में संशय था और लगा था की यह यात्रा राजनैतिक यात्रा है, लेकिन यात्रा जिस सादगी के साथ चल रही वह वकाय अद्भुत है. विन्ध्य टाइम्स की टीम 11 मार्च को अमरकंटक में दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा को कवर करने पहुंची और वहां के अनुभव और यात्रा की रिपोर्ट कुछ यूँ है-

दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा के साथ एक बात तो साफ़ हो गयी की यह यात्रा अध्यात्म,माँ नर्मदा के प्रति समर्पण और सद्भाव की यात्रा है. यात्रा के सियासी मायने क्या होंगे वह तो समापन के बाद ही पता चलेगा.नर्मदा किनारे-किनारे चलते हुए माँ नर्मदा के घाट पर नर्मदा परिक्रमावासियों के साथ आरती और फिर अगले पड़ाव की ओर बढ़ जाना. दिग्विजय सिंह उनकी पत्नी अमृता सिंह और पूर्व सांसद रामेश्वर निखरा के साथ कई परिक्रमा साथी आगे बढ़ रहे हैं. अमरकंटक पहुंचकर लगा की सुरक्षा का ढांचा होगा क्युकी राज्यसभा सांसद हैं दिग्विजय सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री भी रहे हैं,और साथ में कुछ लोग होंगे. 11 तारीख को 12 बजे मार्कण्डेय आश्रम में पूजा-अर्चना के बाद दिग्विजय सिंह ने आम जनता के साथ संवाद कार्यक्रम के माध्यम से नर्मदा परिक्रमा के संकल्प और यात्रा पर अपने अनुभव को साझा किया.

20 वर्ष पहले-

दिग्विजय सिंह ने बताया की 20 वर्ष पूर्व मंडला सर्किट हाउस में रात में ऐसा आभाष हुआ की मुझे नर्मदा परिक्रमा करनी चाहिए और उसके बाद यह प्रण तो लिया था की नर्मदा परिक्रमा करूँगा लेकिन राजनैतिक व्यस्तताओं के कारण परिक्रमा का दिन और समय निर्धारित नहीं हो पाया था  और आज लगभग 20 वर्ष बाद माँ नर्मदा की परिक्रमा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.नरसिंहपुर जिले के बरमान घाट से शुरू हुई यात्रा में समय दर समय आगे बढती गयी और लोग जुड़ते गये. दिग्विजय सिंह ने कहा की मुझे विश्वास नहीं था की अमृता इतने दुर्गम रास्तों से चलकर नर्मदा परिक्रमा कर पाएंगी. लेकिन मजबूत हौसले के साथ आज लगभग 2800 किमी. की यात्रा बिना रुके मेरे साथ कर चुकी हैं.

गजब का जूनून है नीखरा जी में-

रामेश्वर ननीखरा जी जब दिग्विजय सिंह के साथ नर्मदा परिक्रमा में चले थे तो किसी ने नहीं सोचा नहीं था की वो चल पाएंगे.दिग्विजय सिंह खुद बता रहे थे की परिक्रमा शुरू करने के बाद तीसरे दिन मैंने खुद कहा की अब आप वापस चले जाइये तो नीखरा जी भड़क गये और बोले मै तो पूरी परिक्रमा करूँगा . रामेश्वर नीखरा उम्र के ऐसे पड़ाव में हैं और साथ ही उनकी बाईपास सर्जरी भी हो चुकी है लेकिन उसके बाद भी वो नई उमंग,उत्साह और जोश क साथ आगे बढ़ रहे हैं.रामेश्वर नीखरा जी का कहना है की नर्मदा माँ की परिक्रमा का अनुभव जीवन में एक सन्देश हैं एकता का,सद्भाव का और यह परिक्रमा धर्म से ऊपर है.रामेश्वर ननीखरा जी के साथ लगभग 6 किमी. साथ चलना हुआ तो उन्होंने बताया की नर्मदा में जिस प्रकार का खनन हुआ और हो रहा है उससे मै बहुत आहत हूँ.नर्मदा हम सबकी माँ हैं सरकार और प्रशासन मौन है सब मिली भगत के कारण हो रहा है.

मार्कंडेय आश्रम से कपिलधारा तक-

मार्कंडेय आश्रम से कपिलधारा तक की परिक्रमा में महसूस हुआ की नर्मदा प्रदेश के लिए आस्था का केंद्र है.रास्ते में लोग जुड़ते गये नर्मदे हर के नारे के साथ उर्जा का एक संचार लगातार नर्मदा परिक्रमावासियों को मिलता है. अमरकंटक में मार्कंडेय आश्रम से थोड़ा आगे बढ़ने पर ही कल्याण आश्रम दिखता है. कल्याण आश्रम में बने हॉस्टल का वेस्टेज नर्मदा में छोड़ा जा रहा है. इसकी जानकारी होने पर दिग्विजय सिंह रुके और उस विषय को गंभीरता से सुना और समझा साथ ही एक संत ने बताया की नर्मदा अपने उद्गम में ही दूषित हो रही कुछ करिए. संत ने आगे बढ़ने पर बताया की उद्गम से मात्र 2 किमी की दूरी पर ही डैम बना दिया गया है जो बहुत गलत है.माँ नर्मदा के किनारे-किनारे चलते हुए लोगों से मिलते हुए बड़ों का आशीर्वाद लेते हुए परिक्रमा आगे बढ़ी कहीं बच्चों से बात-चीत कहीं महिलाओं से संवाद करते नर्मदे हर के साथ यात्रा अगले पड़ाव की ओर पहुंची.

साथ चलने वालों की बात-

नर्मदा परिक्रमा में साथ चलने वाले लोगों में दिग्विजय सिंह के गृह क्षेत्र राघोगढ़ के लोग भी हैं.परिक्रमा में दिग्विजय सिंह के साथ चल रहे अजय जी का कहना है की 30 सितम्बर से हम साथ हैं और दिग्विजय सिंह और रानी साहब को देखकर बड़ा आश्चर्य होता है की एक राजा कैसे इतना बड़ा संकल्प ले सकता है लेकिन सलाम है राजा साहब और रानी साहब के जज्बे को .एक परिक्रमा साथी का कहना था की मौका मिला और माँ नर्मदा ने आदेश दिया तो आगे भी परिक्रमा करेंगे.माँ नर्मदा  साक्षात् एक शक्ति के रूप में हैं और उन्होंने ही हौसला दिया है जिसके कारण आज यह परिक्रमा सफल समापन की ओर बढ़ रही है.

    छत्तीसगढ़ के नेताओं का जमावड़ा-

अमरकंटक में छत्तीसगढ़ के नेताओं का जमावड़ा रहा. पूर्व केन्द्रीय मंत्री चरणदास महंत,पूर्व मंत्री रवीन्द्र चौबे,पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा और छत्तीसगढ़ कांग्रेस के विधायक और नेता शामिल हुए.छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी भी परिक्रमा यात्रा में शामिल हुई. चरणदास महंत ने कहा की यह यात्रा राजा साहब हम सबको पुण्य दिलाने के लिए कर रहे हैं और गुरु चल रहा है और हम चेले जुड़ते जा रहे हैं.छत्तीसगढ़ कांग्रेस के विधायक पूर्व मंत्रियों के साथ आम जनमानस ने भी परिक्रमा का स्वागत किया.

 

विश्लेषण-

नर्मदा परिक्रमा यात्रा में शामिल होकर और परिक्रमा के सभी पक्षों को ध्यान में रखकर यह तो स्पष्ट हुआ की दिग्विजय सिंह जी की यह निजी परिक्रमा यात्रा सामजिक,भौगोलिक और समरसता के साथ आगे बढ़ रही है.बिना किसी अपील के लोग जुड़ रहे हैं और नर्मदा परिक्रमा के सहभागी बनकर परिक्रमा कर रहे हैं .नर्मदा किनारे बसे आदिवासी समाज के लोग और अन्य लोग परिक्रमा में शामिल लोगों को अपने घर के सदस्य जैसा मान रहे हैं. माँ नर्मदा के प्रति यह दृढ़ संकल्प और आस्था का ऐसा स्वरुप अपने आप में अतुल्यनीय है. दिग्विजय सिंह ने नर्मदा के किनारे-किनारे परिक्रमा करते हुए नर्मदा पर हो रहे अवैध खनन, अवैध निर्माण और प्रदेश और देश भर में आस्था का प्रतीक माँ नर्मदा के प्रति प्रशासन का रवैया भी बखूबी समझा होगा.आज भले की यात्रा सद्भाव,आस्था का प्रतीक है पर प्रदेश का जनमानस माँ नर्मदा के साथ किसी भी अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगी ऐसा लोगों से बात करने पर पता चला. दिग्विजय सिंह नर्मदा परिक्रमा के दौरान लोगों की समस्याएं भी सुन रहे हैं अब आप खुद सोच सकते हैं की 175 दिन में कितनी समस्याएं सुनी होंगी उन्होंने. आदिवासी समाज के पलायन से लेकर विस्थापन के कारणों पर दिग्विजय सिंह जरुर भविष्य में कुछ करेंगे ऐसा उन्हें भावों से प्रतीत हो रह था. यात्रा का असर यक़ीनन मप्र. की राजनीति पर पड़ेगा. दिग्विजय सिंह की परिक्रमा में उनके पुराने राजनैतिक सिपाही समय दर समय जुड़ते जा रहे हैं और जिस उर्जा के साथ वो दिग्विजय सिंह से मिल रहे उसके अलग मायने हैं. दिग्विजय सिंह परिक्रमा के दौरान राजनैतिक विमर्श नहीं चाहते इसलिए सियासत से जुड़ी कोई भी बात नहीं कर रहे लेकिन उन्होंने कहा है की राजनैतिक व्यक्तित्व हूँ परिक्रमा के बाद फिर से सक्रिय हो जाऊंगा. भविष्य में परिक्रमा यात्रा के समापन के बाद बहुत से पक्ष सामने आयेंगे. नर्मदा के स्वरुप से लेकर सत्ता और प्रशासन के काम,खनन और अन्य महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर बात होगी.खुद दिग्विजय सिंह ने कहा है की परिक्रमा के बाद विस्तार से इस पूरी यात्रा का वर्णन होगा सभी पक्षों पर चिंतन किया जायेगा.


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