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Friday 30th of March 2018 | म.प्र. की ऊर्जा राजधानी,देश के सबसे पिछड़े जिलों में !

देश के सबसे पिछड़े जिलो में सिंगरौली तीसरे स्थान में


नीति आयोग के द्वारा देश के १०१ सबसे पिछड़े जिले की एक रिपोर्ट की लिस्ट जारी की गयी, जिसमे मध्यप्रदेश के आठ जिलों को पिछड़े जिले के रूप में चिन्हित किया गया हैं, विन्ध्य क्षेत्र के सिंगरौली को पिछड़ेपन की सूची में तीसरा स्थान मिला है, जबकि इसके बाद बड़वानी, गुना, विदिशा, खंडवा, छतरपुर, दमोह और राजगढ़ का नंबर आता है। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

मध्यप्रदेश की ऊर्जा राजधानी सिंगरौली का देश के तीसरे सबसे पिछड़े जिलों में नाम आना बेहद शर्मनाक और चिंता का विषय है आपको बतादें की सिंगरौली जिला २००८ में सीधी से अलग हो कर अस्तित्व में आया था और इसकी घोषणा करते वक्त प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोगो से कहा था की आने वालेकुछ सालों में सिंगरौली का युद्ध स्टार में विकास कार्य किया जाएगा तथा उन्होंने सिंगरौली को सिंगापुर बनाने का नारा भी दिया था, मगर वर्तमान स्थिति को देख कर ये सब महज शिगूफा ही लग रहा है

आपको बता दें की कांत ने कहा, “मेरा विचार है कि जब तक आप इन इलाकों का नाम लेकर उन्हें शर्म नहीं दिलाएंगे, तब तक भारत के लिए विकास करना काफी मुश्किल होगा। सुशासन को अच्छी राजनीति बनाना चाहिए।” कांत ने पहले कहा था कि पूर्वी भारत के 7 से 8 राज्य हैं जो देश के पीछे खींच रहे हैं, इसलिए इन राज्यों को नाम लेकर शर्म दिलाने की जरूरत है। नीति आयोग के सीईओ ने यहां कहा, “दक्षिण भारत के साथ कोई समस्या नहीं है। पश्चिम भारत के साथ कोई समस्या नहीं है। यह केवल पूर्वी भारत के साथ है, वहां के सात राज्यों और 201 जिलों की समस्या है। जब तक आप इन्हें नहीं बदलते, भारत में कभी बदलाव नहीं आ सकता।”

कांत ने पोषण, गरीबी से पीड़ित बचपन, शिक्षा और युवा व रोजगार पर भारत के ‘यंग लाइव्स लांजीट्यूडिनल सर्वे’ के प्रारंभिक निष्कर्ष को जारी करते हुए कहा, “अगर आप देश के 201 जिलों को देखें, जहां हम असफल हैं..तो उनमें से 53 उत्तर प्रदेश में, 36 बिहार में और 18 मध्य प्रदेश में है।”


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