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राहुल राज में पुरानों की छुट्टी

आगामी चुनाव के दृष्टिकोण से संगठन में फेर बदल


राहुल गाँधी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये जाने के बाद से संगठन में फेर-बदल शुरू हो गये थे.कमान हाँथ आने के बाद सबसे ज्यादा लोगों को ये लगने लगा था की राहुल कांग्रेस में युवाओं की मैराथन भर्ती करेंगें लेकिन ऐसा हुआ नहीं राहुल गाँधी को बखूबी पता था की संगठन को पुराने सिपाहियों के सहयोग और सामंजस्य से ही चलाया जा सकता है. हलाकि राहुल गाँधी कांग्रेस की अलग-अलग विंग में युवाओं को मौका दे रहे हैं और उनका नजरिया यूथ लीडरशिप का है लेकिन पुराने कांग्रेसियों को नाराज न करेने की चुनौती भी सामने है.

गहलोत इन जनार्दन आउट-

संगठन में फेरबदल करते हुए राहुल गाँधी ने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जनार्दन द्विवेदी की जगह संगठन महासचिव नियुक्त कर दिया है. इसके साथ ही जनार्दन द्विवेदी को महासचिव पद से भी हटा दिया गया है. अशोक गहलोत से गुजरात का प्रभार लेकर सांसद राजीव सातव को नया प्रभारी बनाया गया है. पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह को ओड़िशा का प्रभारी नियुक्त किया गया है .मप्र. के सीधी जिले की सिहावल विधानसभा से कांग्रेस विधायक कमलेश्वर पटेल को कुछ समय पहले छत्तीसगढ़ का सह प्रभारी बनाया था जिन्हें राहुल गाँधी ने पद मुक्त कर दिया है और छत्तीसगढ़ में चंदन यादव को सह प्रभारी बनाया गया है.

खुद के पत्र से पद मुक्त हुए जनार्दन द्विवेदी-

नए संगठन प्रभारी का ऐलान और अपनी छुट्टी का ऐलान खुद जनार्दन द्विवेदी ने किया. उनकी जगह गहलोत को संगठन एवं प्रशिक्षण का प्रभारी महासचिव बनाया गया है. नियुक्ति और पदमुक्ति की प्रेस रिलीज पर जनार्दन द्विवेदी के हस्ताक्षर थे. सूत्रों की माने तो सोनिया गाँधी के हटने के बाद से जनार्दन द्विवेदी खुद सभी पदों से हटना चाहते थे और कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में राहुल गाँधी के भाषण के बाद बड़े फेर बदल के कयास लगाये जा रहे थे जो अब धरातल पर उतर रहे हैं.

अभी कुछ औरों की होगी छुट्टी-

लम्बे समय से संगठन के बड़े बड़ों पर तैनात कुछ और बड़े नाम वालों की छुट्टी होगी जिनक परफॉरमेंस कमजोर है.मप्र. के पूर्व प्रभारी एवं वर्तमान महाराष्ट्र प्रभारी मोहन प्रकाश का दबदबा तो बड़ा है लेकिन राहुल गाँधी उनके काम से खुश नहीं हैं इसलिए ऐसी संभावनाएं हैं की मोहन प्रकाश की छुट्टी हो सकती है. उत्तर पूर्वी ज्यादातर राज्यों के प्रभारी सीपी.जोशी का प्रदर्शन भी संतोषजनक नहीं है इसलिए उनकी भी छुट्टी हो सकती है.

सचिन पायलट का रास्ता साफ़-

संगठन प्रभारी अशोक गहलोत को बनाये जाने के बाद राजस्थान में मुख्यमंत्री बनने का सपना पूरी तरह साफ़ हो गया अभी तक अशोक गहलोत के दखल के कारण सचिन पायलट का ये सपना धुंधला पद जाया करता था .अबी खुद राहुल गाँधी ने उनके सपने को क्लियरेंस दे दिया है.

मप्र को लेकर

मप्र. में प्रभारी महासचिव तो पहले बदल दिए गये थे और नये प्रभारी दीपक बावरिया काम-काज सम्हाल चुके है लेकिन बड़ा राज्य होने के कारण एवं दिग्गजों की अच्छी खासी दखल के कारण उन्हें काम करने में दिक्कत तो हो रही है. जैसे ही संगठन में कोई बड़ा परिवर्तन होता है तो भोपाल में हलचले बढ़ जाती है लेकिन मप्र. को लेकर कोई फैसला नहीं हो पता. सूत्रों की मने तो दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा के बाद ही कोई परिवर्तन होंगे. मप्र. की वर्तमान स्थिति को देखते हुए तो यही लग रहा है की नर्मदा परिक्रमा के बाद दिग्विजय सिंह के सामजस्य से ही पार्टी का उद्धार संभव है.सिंधिया और कमलनाथ को लेकर भी कोई बड़ा फैसला हो सकता है.


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