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विन्ध्यमहोत्सव की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल !

अव्यवस्थाओं और मुसीबतों का महोत्सव :विन्ध्य महोत्सव


इस बार ३ अप्रैल से होने वाले विन्ध्य महोत्सव पर शुरू से ही सवाल उठाये जा रहे थे. क्यों कि मात्र १ हफ्ते पहले ही में दिल दहला देने वाली घटना के सदमे आम जनता निकल नही पाई थी, और कांग्रेस के बयानों ने लगातार नाक में दम कर रखा था, लोग आयोजन के औचित्य पर ही सवाल उठाने लगे थे.

शायद प्रशासन को लगा धीरे धीरे सब कुछ ठीक हो जाएगा, और जैसे तैसे महोत्सव का आगाज़ हुआ, उद्घाटन समारोह में ही मंत्री जी ने अपनी मंत्री जी ने समझाने में जुट गए की यह आयोजन क्यों जरूरी है ? उन्होंने ने कहा रीवा का चहूँमुखी विकास हो रहा है, ऐसे में ..विन्ध्य महोत्सव मनाना हमारा अधिकार है.. मगर क्या ये अधिकार क्षेत्र के राजनैतिक और प्रशासनिक घरों के परिवारों तक ही सीमित है ? क्यों की आयोजन को देख के तो ऐसा ही लग रहा था

इसी बीच क्षेत्र के साहित्यकारों और बुद्धिजीविओं ने भी आयोजन समिति पर विन्ध्य के क्षेत्रीय कलाकारों पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए महोत्सव से किनारा कर लिया.

विन्ध्यमहोत्सव में जब विन्ध्य के गौरव को नही मिली एंट्री

अंतिम दिन सोनू निगम के आने के बाद जो हुआ वो बेहद शर्मनाक था, सोनू निगम का शो देखने पहुचे अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाडी ईश्वर पाण्डेय को ही प्रोटोकॉल की आड़ में प्रवेश नही दिया गया ,इसके अलावा लोग वीआईपी पास लेकर इधर उधर भटकने के लिए मजबूर थे, कोई किसी की नही सुन रहा था. और सबसे बुरा हाल था आम जनता का अपने परिवार के साथ गए लोग भीड़ में पिसते और  पुलिस की फटकार सुनते आये..सोनू निगम तो दूर इतनी दूर और भारी भीड़ में मंच ही साफ़ नही दिख रहा था.

रंगारंग कार्यक्रम के समापन के बाद से ही प्रशासन और आयोजन समिति को खूब किरकिरी हो रही है,कोई इसे प्रशासनिक अधिकारियों और व्यापारियों के परिवार तक सीमित मान रहा है तो कोई मंत्री जी और भाजपा का उत्सव

पहले विरोध केवल कांग्रेस के द्वारा देखा जा रहा था. मगर समापन के बाद अब ऐसा लग रहा है की करोड़ों रूपए फूकने के बाद भी प्रशासन को उनकी लापरवाहियों के कारण जनता की तीखी प्रतिक्रियाओं का भी सामना करना पड़ है .

और विन्ध्य महोत्सव अब आयोजनकर्ताओं की गले की फांस बना हुआ है.


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