VT Update
केजरीवाल ने दिया शिवराज को प्रस्ताव शिक्षा में सुधार करना हो तो मनीष को भेज दूँ मध्यप्रदेश सीएम फेस की अटकलों पर शिवराज ने लगाया विराम, कहा कि मेरे ही नेतृत्व में बनेगी भाजपा की अगली सरकार वार्ड क्र 16 में मुख्यमार्ग से परेशान रहवासी, मार्ग का नहीं हो रहा निर्माण, 4 बार किया जा चुका है भूमिपूजन दिल्ली मैट्रो को सितम्बर से बिजली सप्लाई करेगा, बदबार का अल्ट्रामेगा सोलर पावर प्लांट गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के धोबखरी गांव में भाई की जान बचाने नहर में कूदी बहन, हुई मौत
192 दिन 3300 किमी. 117 विधानसभा

समापन हुआ दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा का


आज बरमान घाट में संत समागम और महाप्रसादी के दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा का समापन हो गया. पिछले साल 30 सितम्बर 2017 को शुरू हुई थी . करीब 3325 किलोमीटर की नर्मदा परिक्रमा में दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता सिंह के अलावा कांग्रेस के पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा व नारायण सिंह आमलावे पूरी यात्रा में उनके साथ रहे.

राजनेता दिग्विजय सिंह की धार्मिक नर्मदा परिक्रमा का समापन नरसिंहपुर जिले के बरमान घाट पर पर हो गया. दिग्विजय ने मां नर्मदा की आरती कर समापन कार्यक्रम की शुरूआत की .समापन के अवसर पर जहाँ एक ओर संतो का जमावड़ा रहा वही दूसरी ओर आयोजन कांग्रेस के शक्ति प्रदर्शन जैसा हो गया. प्रदेश कांग्रेस के दिग्गज नेता समापन के अवसर में पहुंचे.

समापन में संत-

नर्मदा परिक्रमा यात्रा के समापन के अवसर पर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंदजी और आध्यात्मिक संत देवप्रभाकर शास्‍त्री 'दद्दाजी' शामिल हुए.कल से बरमान घाट के आयोजन स्थल पर लोगों का आना जाना शुरू हो गया था.आज समापन के अवसर पर साधू-संतों के साथ सामाजिक लोगों का भी जमावड़ा रहा.अभिनेता आशुतोष राणा ने तो दिग्विजय सिंह को राष्ट्रऋषि कहकर संबोधित किया.

दिग्गज कांग्रेसी और कार्यकर्ता-

समापन कार्यक्रम के अवसर पर ज्यादातर भीड़ कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की थी . पूर्व केन्द्रीय मंत्रीगण कमलनाथ, कांतिलाल भूरिया, सुरेश पचौरी और मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरूण यादव के साथ ही कई अन्य पार्टी नेता वहां पहुंचे हैं. वहीं भाजपा में भी दिग्विजय की परिक्रमा समाप्त होने के कारण चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है .दमोह सांसद प्रहलाद पटेल, राज्य मंत्री जालम सिंह, तेंदूखेड़ा विधायक संजय शर्मा के समापन कार्यक्रम में पहुँचने से सियासी पार जोर पकड़ सकता है . दिग्विजय सिंह की नर्मदा परिक्रमा दशहरा के दिन 30 सितंबर 2017 को शुरु हुई थी.

यात्रा के राजनैतिक मायने-

दिग्विजय सिंह ने नर्मदा परिक्रमा शुरू करने के पहले संकल्प लिया था कि वे परिक्रमा के दौरान राजनीति से जुड़ी कोई बात नहीं करेंगे. अपने संकल्प पर अडिग रहते हुए वे राजनीतिक बयानबाजी से पूरी तरह दूर रहे लेकिन समापन पर पार्टी के कद्दावर नेताओं का पहुंचना भविष्य में होने वाले तगड़े घटनाक्रम की ओर इंगित करता है. पदयात्रा के दौरान दिग्विजय ने मध्य प्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में से 110 सीटों का दौरा किया है. यात्रा जरुर अध्यात्मिक और निजी थी लेकिन नर्मदा तट से कांग्रेस की जमीनी हकीकत को भांपते हुए दिग्विजय सिंह बखूभी कांग्रेस की जमीन का आंकलन करते चल रहे थे.

सरकार के टेंशन की मूल वजह-

दरसल दिग्विजय सिंह ने जबसे नर्मदा परिक्रमा शुरू की तब से ही शिवराज सरकार टेंशन में हैं, टेंशन का मूल कारण नर्मदा नदी में अवैध खनन न रुक पाना और नर्मदा संरक्षण के सरकारी वादों की पोल खुलना है. अभी हाल ही में सरकार ने नर्मदा सेवा यात्रा के घोटाले को उजागार करने वाले बाबा को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है उस फैसले पर भी सवाल उठ रहे हैं. शिवराज सरकार ने नर्मदा किनारे 6 करोड़ पेड़ लगाये जाने का फैसला किया था और कागजों में पेड़ लगाये भी गये हैं लेकिन जमीनी हकीकत सरकार की साँस फुला देने वाली है . ऐसे में सरकार का टेंशन में आना लाजमी है और परिक्रमा पूरी करने के बाद दिग्विजय सिंह माँ नर्मदा के नाम पर किसी बड़े घोटाले के खुलासे की बात कर रहे हैं.

नयी राजनैतिक पारी की शुरुआत-

इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता की दिग्विजय सिंह ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम पर सहमत नहीं हैं शायद इसीलिए अब तक कोई सीएम फेस के लिए कोई फैसला नहीं हो पाया है. दिग्विजय सिंह आगामी समय में मध्यप्रदेश की परिक्रमा करेंगे. नर्मदा यात्रा के दौरान उन्होंने मध्यप्रदेश की यात्रा के माध्यम से नाराज कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को मनाने और कांग्रेस की जमीन मजबूत करने के दृष्टिकोण से यात्रा करने की बात कही थी .दिग्विजय सिंह प्रदेश की सियासत में मजबूत दखल रखते हैं और भविष्य में वो अपने आप को और मजबूती के साथ नए कलेवर में प्रदेश की राजनीति में प्रोजेक्ट करना चाहते हैं.अब देखना यह होगा की क्या प्रदेश में आम सहमति से आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एक जुट होकर लड़ेंगी या फिर खेमेबाजी का जाल में फंसी कांग्रेस अपना खुद का नुकसान करेगी.


कुलपति बनने के जुगाड़ समाप्त, शैक्षणिक अनुभव वाले की बन सकेंगे कुलपति !

बीजेपी ने की लोकसभा की तैयारी, प्रदेश के 14 सांसदों के कट सकते हैं टिकट


 VT PADTAL