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Tuesday 10th of April 2018 |  पकौड़ा से छोला-भटूरा तक

 पकौड़ा और छोला-भटूरा के मुद्दे में गुम हो रहे बड़े मुद्दे


सियासी दांव हैं साहब सब चलेगा,पकौड़ा रोजगार से छोला-भटूरा उपवास तक सब हमे हमारे देश की राजनीति में देखने को मिल रहा है. रोजगार देने की बात में पकौड़ा तलना या सीधे तौर पर ठेला लगाना रोजगार है तो वही उपवास के पहले छोला-भटूरा खाना भी उपवास का ही एक स्वरुप है .खा-पी के उपवास करो ताकि उपवास में मन लगा रहे और उत्साह भी बना रहे.

दरसल देश में एक अजीब सी स्थिति निर्मित हो रही है .राजनेता देश के बड़े मुद्दों को छोड़कर छोटी-छोटी बातों में सियासत करने पर आमदा हैं. पकौड़ा तलने को प्रधानमंत्री ने रोजगार क्या कह दिया पूरा विपक्ष बस पकौड़ा तलने में लग गया. सही और गंभीर तरीके से क्या रोजगार न मिल पाने के मूल कारण पर विपक्ष केन्द्रित हुआ ? जवाब है नहीं. जब सरकार को लगा की ये आराम से गुमराह हो सकते हैं तो क्या दिक्कत होने दो. पकौड़ा तलना बंद नहीं हुआ था की कांग्रेस के उपवास के पहले छोला-भटूरा खाते कांग्रेसियों का फोटो वायरल हो गया. दरसल दिल्ली कांग्रेस के बड़े नेता राजघाट में मौन उपवास सत्याग्रह में बैठने वाले थे और उसी सत्याग्रह में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी बैठनें वाले थे तो ऐसे में दिल्ली कांग्रेस के कुछ नेताओं ने सोचा उपवास के पहले थोडा पेट-पूजा कर ली जाए और बैठ गये छोला-भटूरा खाने और बड़े उत्साह से ट्वीटर में फोटो अपलोड कर दिए. राजघाट में पेट-पूजा का उपवास करने पहुंचे कांग्रेसी जैसे ही थोड़ी देर के लिए बैठे बीजेपी के नेताओं ने ट्वीट कर पोल खोल दी. उपवास के पहले खाने पर बवाल मच गया और जमकर खिचाई हुई कांग्रेसियों की.

कांग्रेस भी बचाव में उतर गयी और आज भी पकौड़ा से छोला-भटूरा तक की चर्चाएँ दिल्ली के सियासी गलियारों में सुनने को मिल जायेंगी. लेकिन इन सब के पीछे एक बड़ा सवाल यह है की कहीं ऐसा तो नहीं की पकौड़ा से छोला-भटूरा तक की इस लड़ाई में बड़े मुद्दे,गंभीर विषय धुंधले हो गये हो. आज देशभर में सामाजिक विमर्श को लेकर टकराव की स्थिति निर्मित हो रही है .बेरोजगारी और किसानों की समस्या विकराल रूप लेते जा रही है ऐसे में अगर लोकतंत्र के प्रहरी पकौड़ा और छोला-भटूरा में उलझे रहेंगे तो कैसे काम चलेगा.


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