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Friday 13th of April 2018 | कठुआ केस: पिता की अपील

इन्साफ की उम्मीद लिए एक पिता की गुहार,राजनीति न करें


आज देश की आंख में एक गुस्सा देखा जा सकता है .जम्मू के कठुआ की घटना से देश गुस्से में है. इसी साल जनवरी में आठ साल की बच्ची से दरिंदगी की हद पार की गई. महज 8 साल की बच्ची से गैंगरेप और हत्या के चार महीने बाद पुलिस ने आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इस मामले में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं. वहीं, पूरे मामले को सियासी रंग दिए जाने की कोशिश भी हो रही है. इस बीच बच्ची के पिता का बयान आया है. बच्ची के पिता का कहना है, "मेरी बेटी महज़ आठ साल की थी. वो हिंदू-मुस्लिम नहीं जानती थी. जो आज मेरी बेटी के साथ हुआ, वो कल किसी दूसरे की बेटी के साथ भी हो सकता है. इसलिए इस मामले में राजनीति न करें."
मृतक के पिता बताते हैं की रिश्तेदार के यहा फंक्शन था. पीड़िता के पिता ने अपने सभी बच्चों के लिए नए कपड़े सिलवाए थे. जब दर्जी के यहां से नए कपड़े बनकर आए, तो उसे पहनने के लिए उनकी बेटी इस दुनिया में नहीं थी. उस 'काले दिन' को याद करते हुए बच्ची के 50 साल के पिता सिहर जाते हैं. उन्होंने कहा- "जब लोगों ने बताया कि मेरी बेटी के साथ रेप हुआ है. मेरा शरीर सुन्न पड़ गया. मुझे कुछ भी एहसास नहीं हो रहा था. लगा जैसे सब खत्म हो गया. सबकुछ बर्बाद हो गई."


पीड़िता के पिता ने बताया, "जिस तरह से कुछ स्थानीय लोग मेरी बेटी के हत्यारों और गुनहगारों का समर्थन कर रहे हैं. उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे हैं. उससे घर के सभी लोग डरे हुए हैं. मेरी बच्चियां असुरक्षित महसूस करती हैं."


कठुआ मामले में सीबीआई जांच के खिलाफ 4 मार्च को हिंदू एकता मंच के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन किया था. इसपर पीड़िता के पिता ने कहा, "वे लोग एक बच्ची से रेप और हत्या के आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. इससे बुरा और क्या हो सकता है?" बता दें कि हिंदू एकता मंच की इस रैली में बीजेपी के मंत्री चौधरी लाल सिंह और चंदर प्रकाश गंगा भी मौजूद थे.पीड़िता के पिता का ये आरोप भी है कि ये वारदात सोची-समझी साजिश के तहत हुई. जिसकी तैयारी कई महीने पहले कर ली गई थी. उनके मुताबिक, "हमारा समुदाय हमेशा से सॉफ्ट टारगेट रहा है. हमें बिना किसी कारण के पहले भी परेशान किया जाता रहा है. लेकिन, कभी नहीं सोचा था कि ऐसा कुछ होगा. आज मेरी बेटी के साथ वो सब हुआ. हो सकता है कि कल किसी दूसरे की बेटी के साथ वैसा हो."
चार्जशीट
क्राइम ब्रांच द्वारा दायर की गई चार्जशीट में कहा गया है कि पूर्व राजस्व अधिकारी संजी राम ने पुलिसकर्मियों को मामला दबाने के लिए 1.5 लाख रुपये की रिश्वत भी दी. इतना ही नहीं मामले को रफा दफा करने के लिए बीजेपी के विधायकों और वरिष्ठ मंत्रियों के अलावा महबूबा मुफ्ती सरकार पर दबाव डाला गया.

क्राइम ब्रांच के खिलाफ हिंदू एकता मंच ने खुलेआम लोगों का समर्थन हासिल करने के लिए तीरंगे का इस्तेमाल किया. आरोपपत्र के मुताबिक आरोपी ने बच्ची को देवीस्थान में बंधक बनाए रखने के लिए उसे अचेत करने को लेकर नशीली दवाइयां दी थी. बच्ची के अपहरण, हत्या और जंगोत्रा एवं खजुरिया के साथ उसके साथ बार-बार बलात्कार करने में किशोर ने मुख्य भूमिका निभाई. किशोर अपनी स्कूली पढ़ाई छोड़ चुका है.

आरोपपत्र के मुताबिक खजुरिया ने बच्ची का अपहरण करने के लिए किशोर को लालच दिया. खजुरिया ने उसे भरोसा दिलाया कि वह बोर्ड परीक्षा पास करने ( नकल के जरिए ) में उसकी मदद करेगा. इसके बाद उसने परवेश से योजना साझा कर उसे अंजाम देने में मदद मांगी , जो राम और खजुरिया ने बनाई थी.
दरिंदगी की हद तक गए आरोपी
चार्जशीट में दरिंदगी की एक और बानगी दिखती है. इसके मुताबिक जब सभी आरोपी मासूम से बारी-बारी से रेप कर रहे थे, तब नाबालिग ने मेरठ में पढ़ने वाले अपने चचेरे भाई को फोन करके कहा कि अगर वह 'मजा लूटना चाहता' है तो आ जाए. इतना ही नहीं चार्जशीट के मुताबिक, बच्ची को मारने से ठीक पहले एक पुलिस अधिकारी ने उन्हें कुछ देर के लिए रोका, क्योंकि वह अंतिम बार फिर रेप करना चाहता था. इसके बाद दूसरों ने भी फिर से बच्ची का रेप किया.
पुलिस को रिश्वत भी दी
चार्जशीट में कहा गया है कि रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई. मारने के बाद भी आरोपियों ने यह सुनिश्चित करने के लिए मासूम मर जाए, उसके सिर पर पत्थर से कई वार किए। बाद में जांच के दौरान राम ने पुलिसकर्मियों को मामला दबाने के लिए 1.5 लाख रुपये की रिश्वत भी दी.
इन पर केस
आरोपियों में राम, उसका बेटा विशाल, सब-इंस्पेक्टर आनंद दत्ता, दो विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजुरिया और सुरेंद्र वर्मा, हेट कॉन्स्टेबल तिलक राज और स्थानीय नागरिक प्रवेश कुमार शामिल हैं. इनके खिलाफ रेप, मर्डर और साक्ष्यों को छिपाने की अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया है.


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