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Friday 27th of April 2018 | छलका दर्द,ख़ामोशी उधर भी

सिंधिया और अरुण यादव खुश है ?


भोपाल. लम्बे समय की उठापटक के बाद आखिरकार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने मप्र में नेतृत्व परिवर्तन किया. कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया. इसके अलावा 4 कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए गए. इनमें से राम निवास रावत सिंधिया के नजदीकी विधायक हैं. पूरे प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में बधाईयों का दौर शुरू हो गया है. कमलनाथ ने राहुल गांधी एवं सोनिया गांधी का आभार जताया है परंतु ज्योतिरादित्य सिंधिया चुप हैं. वो अपना काम कर रहे हैं परंतु अपनी नियुक्ति के बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा. छिंदवाड़ा में होली और दीवाली एक साथ मनाई जा रही है, लेकिन ग्वालियर, शिवपुरी, गुना में सन्नाटा है. दरअसल लम्बे समय से सिंधिया को सीएम चहेरा घोषित करने की भी मांग रही है.कुछ समाचार चैनलों के सर्वे में भी सिंधिया के पक्ष में रुझान थे लेकिन सिंधिया की मंशा पूरी नहीं हुई.पीछे चुनाव में भी सिंधिया चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष थे इसलिए यह जिम्मेदारी खुश करने वाली नहीं लग रही.यूँ तो सिंधिया सोशल मीडिया में काफी सक्रिय रहते हैं लेकिन उन्होंने नेतृत्व का इस जिम्मेदारी पर आभार नहीं जताया.

अरुण यादव का छलका दर्द-

कमलनाथ के नाम के ऐलान के बाद अरुण यादव देर शाम मीडिया में मुखातिब हुए और उनका दर्द छलक गया और उन्होंने साफ़-साफ़ कह दिया की अब वो कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे. कुल मिलाकर अरुण यादव का चुनावी राजनीति से संन्यास कल ही हो गया, लेकिन उन्होंने कहा की वो एक सामान्य कार्यकर्त्ता की हैसियत से संगठन का काम करेंगे. केन्द्रीय नेतृत्व उन्हें जो भी जिम्मेदारी देगा वो उसे निभाएंगे. साथ ही अरुण यादव ने कहा की नए अध्यक्ष की घोषणा के सम्बन्ध में उन्हें जानकारी नहीं थी.

अब आगे क्या-

आगे उम्मीद है की अरुण यादव को कुछ बड़ी जिम्मेदारियां केंद्र में दी जा सकती है. साथ ही सिंधिया का रुख साफ़ होने तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी.अफवाहें तो कहती है की सिंधिया कमजोर हो गये. कमलनाथ और दिग्विजय एक हो गये. खैर देर सवेर कांग्रेस ने फैसला किया है शायद इसके परिणाम कांग्रेस के लिए अच्छे हों. बीजेपी ने तो कहा है की कोई फर्क नहीं पड़ता कांग्रेस की कमान फिर से पूंजीपतियों के हाँथ में चली गयी है.


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