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Tuesday 1st of May 2018 | ऐतिहासिक आन्दोलन की ओर किसान

सरकार के खिलाफ जून में बड़ा आन्दोलन


नई दिल्ली. आजाद भारत के इतिहास में पहली बार पूरे देश के किसानों ने हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है. राष्ट्रीय किसान महासंघ का दावा है कि देश भर में किसान नरेंद्र मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों के विरोध में 1 जून से लेकर 10 जून तक हड़ताल पर रहेंगे. इस हड़ताल के दौरान मंडियों में अनाज, सब्जी और दूध की आपूर्ति ठप कर दी जाएगी. कहा जा रहा है कि इस महासंघ से 110 किसान संगठन जुड़े हुए है. किसान संगठनों के इतने बड़े ऐलान के बाद सरकार की मुसीबतें बढ़ सकती हैं. भाजपा के पूर्व मंत्री यशवंत सिन्हा समेत समूह के नेताओं ने मीडिया से कहा कि राष्ट्रव्यापी भारत बंद 01 जून से शुरू होकर 10 जून को अपराह्न दो बजे तक चलेगा. सिन्हा ने कहा,‘ किसान पूरे देश में एक जून से दस जून तक अनाजों, सब्जियों और दूध जैसे उत्पादों को गांवों से शहरों में भेजना बंद कर देंगे.

वादे के अनुसार समर्थन मूल्य की मांग-

यशवंत सिन्हा ने दावा किया कि हालांकि सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का वादा किया था जो कि उत्पादन लागत से 50 प्रतिशत अधिक था लेकिन किसानों को अभी तक उच्च कीमतें नहीं मिलीं. सिन्हा ने कहा,‘मैं यह कह सकता हूं कि मोदी सरकार ने उनके (किसानों) लिए कुछ भी नहीं किया. यहां तक कि नरेंद्र मोदी सरकार ने उन वादों को भी पूरा नहीं किया गया जो भाजपा के घोषणा पत्र में लिखे हुए थे.’

मप्र में भी अधूरी घोषणा-

मध्य प्रदेश के किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा,‘हम मांग कर रहे हैं कि एमएसपी जमीन की लागत सहित उत्पादन की पूरी लागत का 1.5 गुना हो. हालांकि सरकार ने इसे अपने आखिरी बजट में घोषित कर दिया था, लेकिन इसमें कोई विशेष विवरण नहीं है और इससे हमारे किसानों को मदद नहीं मिल रही है.’

व्यापारियों से समर्थन की दरखास्त-

इस 10 दिवसीय आन्दोलन के लिए संगठन बड़े व्यापक स्तर पर व्यापारियों से समर्थन मांग रही है .पिछले महीने महाराष्ट्र में वाम दलों के नेतृत्व वाले एक लम्बे मार्च के लिए किसानों को बधाई देते हुए सिन्हा ने झूठे वादे करने के लिए सरकार की आलोचना की. किसानों ने व्यापारिक संगठनों से भी उनके 10 जून के भारत बंद का समर्थन करने का आग्रह किया.अब देखना यह है की यह आन्दोलन कितना सफल होता है क्युकी कहीं न कहीं ऐसे ऐलान के बाद सरकार भी चिंतित होगी .चुनावी साल में ऐसे आन्दोलन सरकार के लिए मुश्किल खाड़ी कर सकते हैं.


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