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नए गठबंधन की ओर कांग्रेस

विधानसभा चुनाव 2018, कांग्रेस-बसपा साथ-साथ ?


"2018 विधानसभा चुनाव को महज 6 महीने ही बचे हैं और सियासी समीकरण कुछ यूँ बन रहे हैं की अब कांग्रेस से बनवास झेला नहीं जा रहा. कांग्रेस अब हर हाल में प्रदेश में सरकार बनाने की कोशिश करेगी. मप्र. कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही एक नए समीकरण की चर्चा जोरों पर है. मप्र. में कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन करने की फिराक में है. विन्ध्य,चम्बल और बुदेलखंड की कुछ सीटों पर बसपा का प्रभाव हमेशा से रहा है. अब कांग्रेस को यह उम्मीद है की बसपा से गठबंधन करने से वोटों का ध्रुवीकरण नहीं होगा और साथ चुनाव लड़ने में कांग्रेस को ओबीसी और दलित समुदाय के वोट मिलेंगे. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 2 दिन पहले बसपा के बड़े नेताओं की दिल्ली में कांग्रेस के नेताओं से चर्चा हुई है और ऐसे में अफवाहों का बाजार और गर्म हुआ है .अगर गठबंधन हुआ तो भविष्य में कांग्रेस और बसपा साथ आकर मप्र. की शिवराज सरकार खिलाफ लामबंद होंगे"

किन शर्तों पर होगा गठबंधन-

कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी का गठबंधन मूलरूप से  बसपा के प्रभाव वाले जिले को लेकर होगा. ग्वालियर, मुरैना, शिवपुरी, रीवा व सतना जिलों में दो से लेकर सात सीटों पर बसपा की जीत हुई थी  मगर भिंड, मुरैना, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह, रीवा, सतना की कुछ सीटों पर दूसरे स्थान पर रहकर पार्टी ने अपनी ताकत दिखाई है.जिन सीटों पर बसपा ने जीत हासिल की वहां 0.35 फीसदी से लेकर करीब 11 फीसदी वोटों के अंतर से प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशियों को शिकस्त दी है. ऐसे में गठबंधन के तहत 200 सीटों पर कांग्रेस और 30 सीट पर बसपा अपने प्रत्याशियों को लड़ा सकती है लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बसपा 50 सीटों की मांग कर रही है.

पुराने परिणामों के कारण गठबंधन संभव-

बसपा की विन्ध्य क्षेत्र में दस्तक 1989 में ही हो गयी थी जब रीवा जिले से यमुना प्रसाद शास्त्री दूसरी बार सांसद चुने गये थे.तब बसपा के प्रत्याशी को रीवा में 1 लाख से ऊपर वोट प्राप्त हुए थे उसके बाद विधानसभा चुनाव 1993 में बसपा को प्रदेश में 11 सीटें मिली थी .विन्ध्य के साथ-साथ बसपा ने समय दर समय मप्र. में अपना दायदा बढाया है. विन्ध्य, बुंदेलखंड और चम्बल क्षेत्र की ज्यादातर सीटों पर बसपा दूसरे स्थान पर रही है. बसपा ने बहुत पहले ही  कांग्रेस के माने जाने वाले वोट बैंक को हथिया लिया था और आज अकेले रीवा जिले की ज्यादातर सीटों पर बसपा के कारण कांग्रेस को तीसरा स्थान मिलता है.

रीवा जिले में कैसे होंगे समीकरण-

अगर कांग्रेस और बसपा का गठबंधन हुआ तो रीवा जिले की देवतालाब, मनगवां, सेमरिया और त्योथर सीट की मांग बसपा करेगी. देवतालाब सीट पहले बसपा के ही कब्जे में रही है और बाद में भी जब सीट बीजेपी के खाते में गयी तो  बसपा दूसरे स्थान पर रही है. 2008 में बनी सेमरिया विधानसभा में भी बसपा पिछले दोनों विधानसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रही है. ऐसे में अगर गठबंधन हुआ तो रीवा की लगभग 3 सीटें बसपा के खाते में जा सकती है.

क्या होंगे गठबंधन के परिणाम विन्ध्य में -

क्षेत्रीय कांग्रेस नेताओं की माने तो विन्ध्य में बसपा से गठबंधन करने पर कांग्रेस का नुकसान होगा. कांग्रेस के लिए बसपा हमेशा मुसीबत ही रही है. बसपा के कारण कांग्रेस कमजोर हुई है और ऐसे चुनावी साल में अगर यह गठबंधन हुआ तो कांग्रेस को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. कांग्रेस जिन सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारती है वो सीटें अगर बसपा के खाते में गयीं तो कांग्रेस का वोट बैंक खासकर सवर्ण वोट पूरी तरह से बीजेपी में चला जायेगा. बसपा की प्रभाव वाली सीटों के दलित और ओबीसी वोट भी बीजेपी के खाते में जा सकते हैं. इस नजरिये से यह गठबंधन कांग्रेस के लिए हानिकारक है. साथ ही जो प्रत्याशी कांग्रेस या बसपा के लम्बे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं वो भी बगावत कर सकते हैं. कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में सपा से गठबंधन किया था जिसके कारण कांग्रेस को भारी नुकसान झेलना पड़ा था. अब देखना है की आगामी समय में कमलनाथ और शीर्ष नेतृत्व क्या फैसले लेते हैं.


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