पुलिस की कार्यवाही पर उठ रहे सवाल, आरोपियों को संरक्षण देने का पुलिस पर आरोप

पुलिस की कार्यवाही पर उठ रहे सवाल, आरोपियों को संरक्षण देने का पुलिस पर आरोप

 

तराई अंचल के थाना डभौरा अंतर्गत ग्राम मंगड़ौर के निवासी संगीता देवी कोल पति अरुण कुमार कोल ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि मेरे 6 वर्षीय बच्चे के हत्यारों को पुलिस बचाने का प्रयास कर रही हैं मेरे द्वारा पुलिस अधीक्षक रीवा को लिखित शिकायत करने के बाद भी पुलिस संदिग्ध आरोपियों को पकड़ने में आना कानी कर रही है आरोपियों के बजाय फरियादी को ही डाँट फटकार लगाकर डराने धमकाने के साथ साथ थाना चौखट से भगाने में तनिक भी हिचक नहीं कर रही हैं मेरी आवाज को दवाने की भरपूर कोशिश किया जा रही है और मेरे द्वारा दिये गए आवेदन को दरकिनार कर झूँठा कहने का आरोप पुलिस द्वारा मुझ पर ही लगाया जा रहा है| यह आरोप है मृत बेटे के पिता अरुण कुमार कोल|

 

शिकायतकर्ता ने आरोपियों का नाम आवेदन में दर्ज कर शिकाययत की फिर भी पुलिस के द्वारा आरोपियों से पूँछ तांछ तक नही की जा रही है।फरियादी ने पुलिस अधीक्षक रीवा को दिए आवेदन पत्र पर लिखा है कि06 मार्च 2020 को शाम साढ़े पाँच बजे के आस पास मृतक बालक दुर्गेश कोल खेलने के लिए घर से बाहर निकला वापस ना आने पर कुछ देर बाद उसको ढूंढ़ने के लिए आस पड़ोस में पूँछ तांछ की गई साथ में कई पड़ोसी भी खोजने लग गए| बच्चे के ना मिलने पर डभौरा थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई खोजने के दौरान चिंता देवी के घर में एक कमरा बंद मिला था जिसे कई लोगों के कहने के बाद भी चिंता देवी ने नही खोला और यह कहा था कि बहुत पहले से ही तह कमरा बंद है| अगले दिन 7 मार्च को सुबह आरोपी राजू कोल द्वारा पास के ही पत्थर की खदान से मेरे बालक की लाश निकाली गई जांच के लिए पुलिस द्वारा खोजी कुत्ता मगाया गया जो लाश को सूंघने के बाद चिंता देवी के उस कमरे में भी गया जहाँ से चिंता देवी के साड़ी के टुकड़े मिले जिसके टुकड़ों का इस्तेमाल मृतक बालक के हाँथ बांधने एवं मुँह में ठूसने में किया गया था।

पीड़ित परिवार डभौरा थाना प्रभारी की विवेचना पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए यह भी लिखा है कि अकेला राजू कोल बालक की हत्या नही कर सकता था बिना उसकी मां चिंता देवी की मदद के।इसके बाद भी थाना प्रभारी साजिसन चिंता देवी को बचाने की नीयत से गाँव से ले जाते समय रास्ते में ही गाड़ी से उतार दिया गया था और आज तक उसे इस हत्या का अभियुक्त नही बनाया गया जबकि इस हत्या की शाजिस में चिंता देवी का पति काशी प्रसाद कोल भी शामिल हैं| फरियादी परिवार द्वारा 7 मार्च से डभौरा थाना प्रभारी द्वारा किये जा रहे विवेचना एवं ब्यवहार से आहत होकर 13 मार्च को पुलिस अधीक्षक रीवा से फरियाद की गई तीन पेजों के आवेदन पत्र द्वारा अपनी फरियाद की गई उसे बावजूद थाना प्रभारी के बर्ताव पर ना कोई परिवर्तन हुआ और ना ही फरियादियों द्वारा आरोपित की गई महिला को आरोपी बनाया गया इससे पीड़ित परिवार एवं ग्राम वासियों के कथनों पर अगर गौर किया जाय तो थाना प्रभारी की कार्य शैली संदेह के घेरे में आती है अगर उच्च स्तरीय जाँच कराई जाय तो पीड़ित परिवार को न्याय मिल सकता है एवं अपराधियों की संख्या बढ़ सकती है।