Ayodhya Ram Mandir: पहली बार अयोध्या में कदमों से नाप कर बनाई थी डिजाइन,कौन हैं भव्य राम मंदिर के आर्किटेक्ट

Ayodhya Ram Mandir: पहली बार अयोध्या में कदमों से नाप कर बनाई थी डिजाइन,कौन हैं भव्य राम मंदिर के आर्किटेक्ट

अयोध्या  में राम मंदिर का भूमि पूजन 5 अगस्त को होने वाला है. इस कार्यक्रम का नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं. 5 अगस्त को भूमि पूजन के साथ मंदिर के परियोजना के उद्घाटन होने की उम्मीद है. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 200 लोग शामिल होंगे. सोमनाथ मंदिर को डिजाइन करने वाले प्रभाशंकर सोमपुरा के परिवार ने राम मंदिर के डिजाइन का निर्माण किया है. 1990 में कुछ समय बाद चंद्रकांत सोमपुरा पहली बार विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख अशोक सिंघल के साथ अयोध्या आए. सोमपुरा मंदिरों के आर्किटेक्ट के परिवार से आते हैं, उन्होंने बताया कि उस समय विवादित जमीन एक सैन्य शिविर की तरह थी. मैं बिना किसी मेजरिंग इंस्ट्रूमेंट के अंदर गया और अपने पैरों की गिनती से मंदिर का नाप लिया था. बाबरी मस्जिद का विध्वंस का गवाह बने और दशकों से चली आ रही कानूनी लड़ाई को पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि विवादित जमीन को राम मंदिर के ट्रस्ट को सौंप दिया जाए. वहीं बाबरी मस्जिद के विध्वंस का मामला अभी भी सीबीआई के स्पेशल कोर्ट में जारी है. 5 अगस्त को भूमि पूजन के साथ मंदिर के परियोजना के उद्घाटन होने की उम्मीद है. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत 200 लोग शामिल होंगे. सोमपुरा ने कहा कि वो महसूस कर सकते हैं कि अब चीजें आगे बढ़ रही हैं. सोमपुरा ने बताया कि उनके अहमदाबाद के ऑफिस में कई लोग मंदिर के 3डी डिजाइन पर काम कर रहे हैं. यह नए और बड़े राम मंदिर का डिजाइन है. 18 जुलाई को रामजन्मभूमि ट्रस्ट की बैठक में मंदिर के डिजाइन को फाइनल किया गया है. सोमपुरा के दादाजी प्रभाशंकर सोमपुरा को सोमनाथ मंदिर बनाने का श्रेय दिया जाता है. सोमपुरा के बेटे अशीष सोमपुरा मंदिर परियोजना की साइट को संभालते हैं और ट्रस्ट की बैठक में भी शामिल हुए थे. उनका कहना है कि हमारे परिवार ने तभी से काम करना शुरू कर दिया जब मेरे पिता 1990 में पहली बार मंदिर देखकर आए थे. उन्होंने माना कि परियोजना में तेजी विध्वंस के बाद आई. उन्होंने आगे कहा, उंचाई तब आई जब ढांचा गिरा. प्रचार हुआ और हमने महसूस किया कि यह एक बड़ी बात है. सोमपुरा का कहना है कि वास्तुकला के गुण उन्हें अपने पूर्वजों से मिले हैं जिन्होंने दिव्य विश्वकर्मा मंदिर का निर्माण किया है . उनके बेटे और पोते भी उसी काम को आगे बढ़ा रहे हैं. सोमपुरा के बड़े बेटे निखिल का  28 वर्षीय बेटा आशुतोष एक सिविल इंजीनियर है और अपने फैमिली बिजनेस से जुड़ गए हैं. सोमपुरा ने बताया, “हमने एक मॉडल बनाया था जिसमे मस्जिद के तीन गुंबद और एक तरफ मंदिर होगा. श्रद्धालु विवादित जमीन पर आकर पूजा कर सके जैसे कि मथुरा में है. लेकिन वीएचपी ने इस प्रस्ताव को मना करते हुए कहा कि अगर जन्मस्थल पर मंदिर नहीं बनता है तो हमारे लिए कोई मतलब है फिर चाहे सरयु के किनारे बने या अहमदाबाद में” सीनियर सोमपुरा ने कहा कि मैं मंदिर के पुराने डिजाइन को भूल गया हूं, वो नगरी शैली में बना था जिसमें गर्भगृह के उपर एक मंदिर का टॉवर था. सोमपुरा ने कहा कि अशीष को 5 अगस्त को मंदिर निर्माण परियोजना के लिए आमंत्रित किया गया है. नए डिजाइन में तीन गुबंद को जोड़ा गया है एक सामने से और दो साइड से, स्तंभों की संख्या 160 से 366 हो गई है. मंदिर की की सीढ़ियों की चौड़ाई 6 फीट से बढ़ाकर 16 फीट कर दी गई है. मंदिर की ऊचांई को 141 फीट से बढ़ाकर 161 फीट कर दिया गया है. मंदिर का गर्भ गृह भगवान विष्णु को समर्पित मंदिरों को लिए शास्त्रों द्वारा डिजाइन में रखते हुए अष्टकोणीय होगा. सीता, लक्ष्मण, गणेश और हनुमान और अन्य देवाताओं को समर्पित चार अन्य मंदिर परिसर का हिस्सा होंगे. अशीष ने बताया कि मूल डिजाइन में  3 लाख क्यूबिक सैडस्टोन पत्थर का इस्तेमाल होना था लेकिन अब इसका दोगुना इस्तेमाल किया जाएगा. सोमपुरा का मानना है कि राम मंदिर के निर्माण को पूरा होने में करीब साढे 3  साल का समय लगेगा और महामारी के कारण ये समय करीब 6 से 8 महीने और बढ़ गया है. मंदिर के निर्माण के लिए तीन ठेकेदारों को आउटसोर्स किया था. अब लार्सन एंड टुब्रो ने जिम्मेदारी संभाल ली है. अशीष का कहना है कि सोमनाथ मंदिर से हमारी परिवार की भावनाएं जुड़ी है यह हमारे लिए बहुत खास है. हमारा परिवार अब दोनों मंदिरों से जुड़ा हुआ है. हमारे लिए ये खुशी और गर्व की बात है