हिंदू महासभा की कॉंग्रेस को नसीहत पार्टी का नाम बदलकर रख ले 'गोडसे वादी कांग्रेस"

हिंदू महासभा की कॉंग्रेस को नसीहत पार्टी का नाम बदलकर रख ले  'गोडसे वादी कांग्रेस

ग्वालियर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 44 से पूर्व पार्षद बाबूलाल चौरसिया के कांग्रेस में वापसी पर प्रदेशव्यापी सियासत, अब राष्ट्रीय स्तर पर शुरू होने की संभावना है। दरअसल गोडसे पूजक बाबूलाल चौरसिया का पुन: कांग्रेस में शामिल हो जाना अखिल भारत हिंदू महासभा को कुछ ज्यादा ही खटक गया है। 26 फरवरी को हिंदू महासभा ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर कांग्रेस का नाम बदलने की सलाह दे डाली है। हिमस के प्रदेश महामंत्री विनोद जोशी द्वारा पोस्ट किए गए इस पत्र में लिखा है कि कांग्रेस ने अपनी गलती स्वीकार की है और गांधीवादी कांग्रेस में गांधी की हत्या करने वाले  गोडसे की विचारधारा को स्वीकार किया है। पत्र में लिखा है कि ग्वालियर में नाथूराम गोडसे का मंदिर निर्माण करने वाले पूर्व पार्षद बाबूलाल चौरसिया अकेले ही कांग्रेस में सदस्यता ले पाए। इससे सिद्ध होता है कि गांधीवादी कांग्रेस में अब आम नागरिक आना नहीं चाहता। इसलिए पार्टी का नाम बदलकर 'गोडसे वादी कांग्रेस" रख लें। जिससे आपका राजनीतिक स्वरूप बच सके और गोडसेवादी संगठन की शक्ति बढ़ाएं।

गौरतलब है कि 25 फरवरी को हिंदू महासभा ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ को पत्र लिखा था। जिसमें लिखा गया था कि हिंदू महासभा के पार्षद बाबूलाल चौरसिया को कांग्रेस में शामिल करके, कांग्रेस ने नाथूराम गोडसे की विचारधारा स्वीकार कर ली है। यह हिंदू महासभा की जीत है।

वहीं बाबूलाल चौरसिया को कांग्रेस में शामिल कराने वाले ग्वालियर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रवीण पाठक ने इंटरनेट मीडिया पर वीडियो अपलोड किया है। वीडियो में अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बाबूलाल चौरसिया बोल रहे हैं कि 'जब बाल्मीकि जी एक डकैत होकर संत बन सकते हैं, तो मेरा हृदय परिवर्तन क्यों नहीं हो सकता। मैं तो आम आदमी हूं, मेरा भी हृदय परिवर्तन हो सकता है। अब मैं कांग्रेस में शामिल होकर महात्मा गांधी की लाठी बनने जा रहा हूं।

बाबूलाल चौरसिया पहले कांग्रेस के पार्षद थे, बाद में ये हिंदू महासभा में चले गए। पार्टी ने भी उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था।