कहीं आपके दिल में शार्ट सर्किट तो नहीं हो रहा, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में रेडियोफ्रीक्वेंसी से होगा इलाज

कहीं आपके दिल में शार्ट सर्किट तो नहीं हो रहा, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में रेडियोफ्रीक्वेंसी से होगा इलाज

रीवा. आपके दिल की धडकऩ अचानक तेज गति से धडकऩे लगे या फिर घटती-बढ़ती है तो इसे दिल की नादानी न समझें। हो सकता है कि आपके दिल में शॉर्ट सर्किट हो रहा हो। मांसपेशियां कमजोर होने के साथ ही दिल फैल सकता है। इसे इसके इलाज में रेडियोफ्रीक्वेंसी की नई तकनीक है। दिल में शॉर्ट सर्किट वाले तारों पर निश्चित वेबलेंथ की खुराक छोडकऱ उन्हें फ्यूज कर दिया जाता है। यह कहना है सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के कॉर्डिलॉजिस्ट डॉ एसके त्रिपाठी का। इस तरह के रोगियों के लिए अच्छी खबर यह है कि अब सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में रेडियोफ्रीक्वेंसी ऑब्लेशन की तकनीक से दिल के धडकऩ का इलाज शुरू हो गया है। सुपर स्पेशलिटी में दिल की असमान्य धडकऩ का इलाज पहली बार हुआ है. आपको बता दें
सुपर स्पेशलिटी में दिल धडकऩे वाले मरीजों का इलाज शुरू हो गया है। हॉस्टिपल में कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ एसके त्रिपाठी ने सपुर स्पेशलिटी में इलाज चालू करने के लिए जयपुर से इलेक्ट्रो फिजेशियान डॉ. कुश भगत को विशेष रूप से बुलाया। दिल धडकऩे वाले तीन मरीजों का नई तकनीकि यानी रोडियोफ्रीक्वेंसी आब्लेशन की पद्धति से डॉ कुश भगत के सहयोग से इलाज शुरू कर दिया है। डॉ एसके त्रिपाठी के मुताबिक दिल धडकऩे वाले मरीजों को अभी तक बाहर जाना पड़ता था। अब सुपर स्पेशलिटी में इलाज मिल सकेगा। उन्होंने बताया कि अस्पताल में 40 साल की निर्मला, 60 साल के इंद्रमणि और 30 साल के शुभम का इलाज किया गया। इलाज सफल है। वह अब फिट हो गए हैं। मरीज को इलाज के बाद छह घंटे में छुट्टी कर दी गई।
वहीं विंध्य में सबसे बड़े हॉस्पिटल सुपर स्पेशलिटी में दिल की असामान्य धडकऩ का पहली बार रेडियोफ्रीक्वेंसी से इलाज किया गया है। हॉस्टिपल के कॉर्डियक केयर में इसे संभव किया डॉ एसके त्रिपाठी ने। त्रिपाठी ने जयपुर के डॉक्टर कुश भगत के सहयोग से तीन मरीजों का इलाज किया है। उनके साथ तकनीकि टीम में जयनारयण मिश्र, सत्यम पंडित रहे। चिकित्सकों की इस सफलता पर डीन डॉ मनोज इंदुलकर, सुपर स्पेशलिटी के अधीक्षक डॉ अक्षय श्रीवास्तव ने बधाई दी है।