मध्य प्रदेश: दिसंबर-जनवरी में निकाय हो सकता है और पंचायत चुनाव कराने की तैयारियां शुरू

मध्य प्रदेश: दिसंबर-जनवरी में निकाय हो सकता है  और पंचायत चुनाव कराने की तैयारियां शुरू

मध्य प्रदेश सरका ने नगरीय निकाय और पंचायतो के चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. जिलों के अन्दर वार्ड आरक्षण का कम तेजी से चल रहा है. अब आध्यादेश के जरिये महापौर और अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली द्वारा कराये जाने का संशोधित प्रावधान किया जाएगा. देश में भले ही 27 विधानसभा सीटों के उपचुनाव को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है, पर सरकार ने नगरीय निकाय और पंचायतों के चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. वार्ड आरक्षण का काम जिलों में तेजी के साथ चल रहा है. बताया जा रहा है कि दिसंबर या जनवरी में ये चुनाव कराए जा सकते हैं. नगरीय निकाय चुनाव के लिए नगर पालिक विधि (संशोधन) अधिनियम विधेयक भी लाया जा रहा था लेकिन विधानसभा का मानसून सत्र स्थगित हो गया. अब अध्यादेश के जरिए महापौर और अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली यानी सीधे जनता द्वारा कराए जाने का संशोधित प्रावधान किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार नगरीय निकायों की सीमा में परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी कर चुकी है. कमल नाथ सरकार ने जिन 22 नगर परिषदों को अधिसूचना निरस्त करके ग्राम पंचायत बना दिया था, उन्हें फिर से नगर परिषद बनाया जा चुका है. इन निकायों की मतदाता सूची बनाने के लिए राज्य चुनाव आयोग ने कलेक्टरों को जो आदेश दिए थे, वे स्थगित कर दिए गए हैं. शिवराज सरकार ने पिछले कार्यकाल में विभिन्न पंचायतों को मिलाकर 22 नगर परिषद बनाई थीं. कांग्रेस सरकार ने आते ही राजनीतिक दृष्टिकोण से इस फैसले को निरस्त कर दिया था. वहीं, नगरीय निकाय चुनाव प्रणाली में भी बदलाव करके महापौर और नगर पालिका व नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव पार्षद के माध्यम से करने के लिए अधिनियम में संशोधन किया था. भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए इसका विरोध किया था. पुनः सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस अधिनियम में फिर से संशोधन करके पुरानी व्यवस्था बहाल करने के निर्देश दिए हैं. नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब अध्यादेश के माध्यम से अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित है. हालांकि, इस बारे में अंतिम निर्णय सरकार लेगी. वार्ड आरक्षण अंतिम चरण में वहीं, नगरीय निकाय चुनाव को लेकर परिसीमन की कार्रवाई पूरी हो चुकी है. अधिकांश निकायों के परिसीमन को सत्ता में परिवर्तन के बाद निरस्त किया जा चुका है. भोपाल नगर निगम के दो हिस्से करने सहित अन्य निकायों के परिसीमन के प्रस्ताव राजभवन से वापस बुलाए जा चुके हैं. वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया अंतिम दौर में चल रही है. अधिकारियों का कहना है कि निकायों की आरक्षण प्रक्रिया पूरी करके राज्य निर्वाचन आयोग को सूचना भेज दी जाएगी. इसके बाद आयोग तय करेगा कि उसे कब चुनाव कराने हैं. सूत्रों का कहना है कि सितंबर के बाद कभी-भी विधानसभा की 27 सीटों के उपचुनाव कराए जा सकते हैं. इन चुनावों के बाद पहले नगरीय निकाय और फिर जिला, जनपद और ग्राम पंचायत संस्थाओं के चुनाव कराए जाएंगे. इनके परिसीमन की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है.