श्रम कानून में हुए बदलाव के बाद सरकार के फैसले का हुआ विरोध

श्रम कानून में हुए बदलाव के बाद सरकार के फैसले का हुआ विरोध

मध्य प्रदेश की आर्थिक स्थिति लॉक डाउन के बाद बिगड़ गई है| प्रदेश की आर्थिक स्तिथि को सुधारने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए श्रम कानून में बदलाव किए| अब सरकार के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है|  श्रम कानून में संशोधनों का ट्रेड यूनियन ने विरोध करना शुरू कर दिया है| सोमवार को ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चे ने प्रदर्शन किया| इंटक के युवा अध्यक्ष दीपक गुप्ता ने बताया कि मजदूरों से 12 घंटे काम करवाने का निर्णय बहुत ही असंवैधानिक है|

उन्होंने कहा कि कार्ल मार्क्स ने सैकड़ों साल पहले जब श्रमिकों के कार्य के घंटे कम करवाये थे| अभी देश के 40 करोड़ मजदूरों के लिए हालात बहुत ही खराब है| मजदूरों के लिए इतिहास में इतना खराब समय कभी नहीं हुआ| दीपक गुप्ता ने बताया कि संगठन ने सभी कर्मचारियों को प्रदर्शन करने के लिए कहा था इसलिए जो कर्मचारी जहां पर था, उसने वहीं पर आज प्रदर्शन किया| इसके अलावा पीएम नरेंद्र मोदी को भी चिट्ठी लिखी गई|