पार्टी बदलकर चुनाव मैदान में उतरे नेताओं की किस्मत नहीं बदली

पार्टी बदलकर चुनाव मैदान में उतरे नेताओं की किस्मत नहीं बदली

बड़े पैमाने पर हुए दलबदल की वजह से प्रदेश में पहली बार हुए इतने उपचुनाव में कुछ दलबदलुओं की किस्मत फिर चमक गई तो कुछ अपनी किस्मत बदलने में कामयाब नहीं हो पाए। सुरखी और बमोरी में सिंधिया के समर्थक मंत्रियों के सामने कांग्रेस प्रत्याशी हाल ही में पार्टी बदलकर कांग्रेस में आए थे, लेकिन मौजूदा स्र्झानों से नजर आ रहा है कि वे इन मंत्रियों को कड़ी टक्कर नहीं दे पाए। उन्होंने चुनाव से पहले पार्टी तो बदल ली, लेकिन अपनी किस्मत बदलने में कामयाब नहीं हो सके। कांग्रेस कार्यकर्ता भी इन दोनों उम्मीदवारों को स्वीकार नहीं कर सके। सुरखी में कांग्रेस से भाजपा में आए गोविंद सिंह राजपूत को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने पूर्व विधायक पारुल साहू को मैदान में उतारा था। पास्र्ल साहू पिछले दिनों ही भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई थी। उन्होंने भाजपा में उपेक्षा का आरोप लगाया था। 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काटकर सुधीर यादव को उम्मीदवार बनाया था। बता दें की वे तब से ही पार्टी नेताओं से नाराज चल रही थीं। बमोरी में मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया के सामने पूर्व मंत्री कन्हैया लाल अग्रवाल थे अग्रवाल पहले भाजपा में थे। 2008 से 2013 की भाजपा सरकार में वे मंत्री रहे थे, लेकिन 2013 के विधानसभा चुनाव में वे हार गए थे। 2018 में उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया तो वे निर्दलीय चुनाव लड़े और हार गए। उपचुनाव से पहले फिर विधायक बनने के लिए कांग्रेस में चले गए, लेकिन इस चुनाव में भी उन्हें सफलता नहीं मिली।