दिल्ली से ट्रेन चली तो न सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर हें न ज़रूरी एतियात बारात रहे लोग

दिल्ली से ट्रेन चली तो न सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर हें न ज़रूरी एतियात बारात रहे लोग

 

देश की राजधानी दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से जब हम मंगलवार शाम भोपाल एक्सप्रेस में सवार हुए तो न सोशल डिस्टेंसिंग से जुड़े एहतियात नजर आए, न पहले दिन की तरह किसी यात्री से उसका नाम, पता पूछा गया। सिर्फ बॉडी का टेम्प्रेचर देखकर एंट्री दे दी गई। ट्रेन में चढ़ने-उतरने और बैठने में कहीं भी दो गज की दूरी जैसी कोई बात नहीं मानी गई।

दिल्ली से लौटते वक्त भी भोपाल एक्सप्रेस आधी खाली ही आई। 9 बजे हजरत निजामुद्दीन से निकली इस ट्रेन के डी-4 कोच का एसी रात साढ़े नौ बजे ही बंद हो गया, इसमें पहली बार एलबीएच कोच लगाए गए हैं। इनमें खिड़की नहीं खुलती। इस कारण एसी बंद होते ही यात्री पसीना-पसीना हो गए। कोच में बुजुर्ग और बच्चे भी थे, जो घबराने लगे।

मैकेनिक तुरंत रिपेयरिंग करने में जुट गए लेकिन यात्रियों का सब्र टूट गया। वे टीटीई पर भड़क गए। इसके बाद टीटीई ने डी-4 कोच के सभी पैसेंजर्स को बी-1 में शिफ्ट किया, तब कहीं जाकर स्थिति सामान्य हुई। ट्रेन करीब आधी खाली थी इसलिए यात्रियों को दूसरी सीटों पर शिफ्ट करने में दिक्कत नहीं हुई।

मेरी जांच एक सेकंड में हो गई, किसी ने कुछ पूछा ही नहीं

दिल्ली से ग्वालियर जा रहे नीरज कहते हैं, ‘मैं नोएडा में रहता हूं। नोएडा से दिल्ली आने में कहीं कोई पूछताछ नहीं हुई। मुझे लग रहा था कि हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर जांच की लंबी लाइन होगी लेकिन यहां तो कोई लाइन मिली ही नहीं। मुझसे बिना कोई जानकारी पूछे सिर्फ टेम्प्रेचर चेक कर एंट्री दे दी गई। इसलिए अंदर आने में बमुश्किल 2 मिनट का समय लगा होगा।

बी-2 कोच में मिले अजय शर्मा कहने लगे, स्टेशन पर कहीं भी सोशल डिस्टेंसिंग फॉलो नहीं की जा रही है। किसी से पूछताछ भी नहीं की गई।  इसलिए सफर करने में थोड़ा डर लग रहा है। शर्मा हबीबगंज में फैक्ट्री चलाते हैं। लॉकडाउन के कारण पिछले दो माह से दिल्ली में ही फंसे थे। भोपाल नहीं आ सके थे।