मोदी सरकार के इस फैसले से चीन को बड़ा झटका

मोदी सरकार के इस फैसले से चीन को बड़ा झटका

मोदी सरकार आत्मनिर्भर भारत, वोकल फॉक लोकल और मेक इन इंडिया के अपने एजेंडे पर बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है. लोकल मैन्युफैक्चरर्स को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कलर टेलीविजन के आयात को प्रतिबंधित कैटिगरी में डाल दिया है.  सरकार के इस फैसले से चीन जैसे देशों का बहुत नुकसान होने वाला है. वह हर साल पर सैकड़ों करोड़ का कलर टीवी भारत निर्यात करता है. इंडियन टेलिविजन मार्केट में चाइनीज ब्रैंड का शेयर लगातार बढ़ता जा रहा था. लेकिन सरकार के इस फैसले से लोकल मैन्युफैक्चरर्स को बढ़ावा मिलेगा. गलवान घाटी घटना के बाद भारत चीन के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है. दो दशक बाद फिर से रंगीन टीवी के आयात पर रोक इसी दिशा में एक बड़ी कार्रवाई है. इससे पहले सरकार ने सरकारी खरीद में चाइनीज कंपनियों की एंट्री बैन कर दी थी. मतलब, केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से किसी भी तरह की सरकारी खरीद में चाइनीज कंपनियां बोली में शामिल नहीं हो सकती हैं. चीन से आने वाले FDI के नियम भी बदले जा चुके हैं. भारत हर साल हजारों करोड़ का रंगीन टीवी का आयात करता है. इसमें चीन की हिस्सेदारी बहुत ज्यादा है और धीरे-धीरे उसका मार्केट शेयर बढ़ रहा था. वित्त वर्ष 2019-20 भारत ने 78.1 करोड़ डॉलर (करीब 5800 करोड़, वर्तमान मूल्य के हिसाब से) कीमत के रंगीन टीवी आयात किये. इनमें से वियतनाम से 42.8 करोड़ डॉलर (करीब 3100 करोड़ रुपये) और चीन से 29.3 करोड़ डॉलर (करीब 2100 करोड़ रुपये) हुआ. पैनासोनिक इंडिया के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनीष शर्मा ने इस बारे में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब उपभोक्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले एसेम्बल्ड टीवी सेट उपलब्ध होंगे. टीवी आयात पर रोक को लेकर विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक नोटिफिकेशन में कहा, कि रंगीन टेलीविजन की आयात नीति को प्रतिबंधित कैटिगरी में डाल दिया गया है. ऐसे में DGFT की मंजूरी के बिना टीवी नहीं आयात किए जा सकते हैं. DGFT वाणिज्य मंत्रालय के तहत आता है. यह आयात प्रतिबंध 36 सेंटीमीटर से लेकर 105 सेंटीमीटर से अधिक की स्क्रीन आकार वाले रंगीन टेलीविजन सेट के साथ ही 63 सेंटीमीटर से कम स्क्रीन आकार वाले एलसीडी टेलीविजन सेट भी प्रतिबंध की कैटिगरी में हैं. भारत को टीवी का निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में चीन, वियतनाम, मलेशिया, हांगकांग, कोरिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड और जर्मनी शामिल हैं.