बाहर फंसे लोगो की संघर्षपूर्ण घर वापसी, कई दिनों तक करना पड़ा भूख का सामना

बाहर फंसे लोगो की संघर्षपूर्ण घर वापसी, कई दिनों तक करना पड़ा भूख का सामना

लॉकडाउन में बाहर फंसे हुए मजदूर, छात्र, सैलानी, जो अपने निजी ठिकानों की ओर बढ़ते गए, सरकार ने लॉकडाउन को कायम कराने की तमाम कोशिशें की राज्य की और जिले की सीमाएं सील की गई लेकिन इसके बावजूद मजूदरों का हुजूम सड़को पर दिखाई दिया| हर किसी को तो बस अपने घर लौटना था| ऐसे में सरकार ने भी मजदूरों छात्रों एवं बाहर फंसे हुए लोगों को उनके घर भेजने के लिए इंतजाम करने शुरू कर दिये लेकिन बाहर फंसे हुए लोगों को घर वापसी में कितना संघर्ष करना पड़ रहा है इसका अंदाजा आसानी से नहीं लगाया जा सकता बाहर से आए हुए शख्स भूख से लड़खड़ा रहे हैं| भले ही प्रसासन ने बहार फंसे लोगो को लाने के लिए बसों के इंतजाम किए, सरकार ने रेल शुरू की लेकिन लेकिन बाहर फंसे लोगो को घरवापसी के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा हैं उन्हें भूखा रहना पड़ रहा आगे आप खुद देखकर स्थिति का अंदाजा लगा सकते हैं|

जब से देश मे लॉक डाउन हुआ तो मजदूरों एवं श्रमिक वर्ग के लोगों का तो जैसे रोजी-रोटी ही छीन गया हो कारखाना बंद हो गए जहां भारी तादाद में मजदूर काम किया करते थे| उसके बाद मजदूर बारी-बारी से अलग-अलग माध्यम को अपनाते हुए कोई पैदल तो कोई साईकिल से या कोई दोपहिया वहन से अपने अलग-अलग व्यवस्था से अपने घर की ओर चल दिये| लॉकडाउन की अवधि बढ़ा दी गई लोगों की बेचैनी भी बढ़ गई लेकिन सबसे ज्यादा कोई परेशान हुआ तो वो हैं बाहर फंसे हुए प्रवासी फिलहाल प्रदेश सरकार के बाद केंद्र सरकार ने भी उन्हें वापस लाने का फैसला किया| बसों के बाद अब स्पेशल ट्रेनें चलाई जाने लगी लेकिन क्या अब इन  इन प्रवासियों की समस्या ख़त्म हो गई हैं तो जबाब हैं नही सरकार के लाखो दावो के बीच मजदुर वर्ग का वो प्रवासी मजदूर जिसकी हालत आज भी ख़राब है सरकार ने बसों का इंतजाम तो कर दिया लेकिन उन्हें भूख से डर लगने लगी हैं| फिलहाल सरकार ने बाहर फंसे हुए मजदूरों को वापस लाने के लिए बसों का इंतजाम किया मजदूर बस से वापस आए| और यहां फंसे हुए मजदूरों को बाहर भेजा जा रहा है लेकिन उन्हें किस पड़ाव से गुजरना पड़ रहा है यह हम आपको बताएंगे दरअसल बाहर फंसे हुए प्रवासी मजदूर आज सुबह तकरीबन 5:00 बजे से ही पहुंचने लगे मार्तंड क्रमांक 3 इंजीनियरिंग कॉलेज अलग-अलग स्थानों पर इनको ठहराया गया| लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था इस तरह से लचर देखि गई जिसकी लापरवाही  कई लोगों पर भारी पड़ सकती| बहार से आने वाले व्यक्तियों को लंबा सफर तय करने के बावजूद भोजन नहीं दिया क्या अपवाद मात्र को छोड़ दें तो किसी को मिला भी होगा|  मजबूरों को घंटो इंतजार करना पड़ा सैकड़ो से ज्यादा लोगो की स्क्रीनिंग लिए  मात्र 4 या 6 स्वास्थ्य कर्मी| और रही बात सोशल डिस्टेंसिंग की तो बाहर से आने वाले लोगों की इस कदर होड़ लगी हुई है बारी बारी से  अलग-अलग जत्थों  को  बस से उतारा गया उनकी स्क्रीनिंग भी कराई गई लेकिन उनमे से कई लोगो को भूख सता रहीं थी हालाँकि बाद में बहार से आये हुये लोगो के मदद के लिए हमेशा की तरह ट्रैफिक डीएसपी मनोज वर्मा सामने आये और लोगो जो भोजन का पैकेट दिया|