Rewa: जलसंसाधन विभाग की बाणसागर परियोजना में शुरुआत से लेकर अब तक भ्रष्टाचार

Rewa: जलसंसाधन विभाग की बाणसागर  परियोजना में शुरुआत से  लेकर अब तक भ्रष्टाचार

जलसंसाधन विभाग द्वारा पूर्व में दी गई नोटिस का जवाब नहीं देने पर आरोप पत्र जारी. कूटरचित बिल तैयार कर 38 लाख रुपए के अनियमित भुगतान का मामला. जलसंसाधन विभाग की बाणसागर परियोजना में शुरुआत से लेकर अब तक भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं. विभागीय तौर पर कोई ठोस योजना और निगरानी सिस्टम नहीं बनाने की वजह से भ्रष्टाचार में बढ़ोत्तरी हुई है. अब बाणसागर बांध के रखरखाव के कार्यों को लेकर अनियमितता सामने आई है. इस पर विभाग ने संबंधित अधिकारियों से नोटिस के जरिए जवाब मांगा लेकिन उनकी ओर से कोई ठोस एवं समाधानकारक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया. इस वजह से अधिकारियों को आरोप पत्र जारी किया गया है. विभाग के अधिकारियों ने 38 लाख रुपए से अधिक की निविदा में शासन के नियमों की अनदेखी करते हुए उस पर ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य भुगतान किया. अब उन सभी अधिकारी, कर्मचारियों की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है जिन पर जिम्मेदारी थी कि शासन की राशि का नियमानुसार खर्च कराएं और उस पर निगरानी रखें. इस विभागीय जांच में गंगा कछार के मुख्य अभियंता को जांच अधिकारी और कार्यालय के प्रशासकीय अधिकारी को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया गया है. - इनकी भूमिका पाई गई संदिग्ध जलसंसाधन विभाग ने आंतरिक जांच में तीन अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध माना है. जिसमें तत्कालीन कार्यपालन यंत्री मुख्य अभियंता कार्यालय गंगा कछार रीवा, एसके गौतम तत्कालीन उपयंत्री पक्का बांध क्रमांक तीन, महेश प्रसाद शर्मा सहायक वर्ग एक गंगा कछार रीवा शामिल हैं. बीते साल मामला सामने आने के बाद कारण बताओ नोटिस जारी की गई थी. सही जवाब नहीं आने की वजह से अब विभागीय जांच शुरू करते हुए आरोप पत्र भी जारी किए गए हैं. - जिम्मेदारों पर यह हैं आरोप--- डीएल वर्मा, तत्कालीन कार्यपालन यंत्री-- गंगा कछार में बतौर कार्यपालन यंत्री पदस्थ रहते निविदा निराकरण समिति के भी सदस्य थे. बाणसागर बांध के एनर्जी डिसीपेशन अरेंजमेंट के बकेट की क्षति सुधार के लिए निविदा जारी हुई थी. करीब पांच लाख रुपए के कार्य की निविदा 43.95 लाख रुपए स्वीकृत कर 38.94 लाख रुपए का शासन का घाटा पहुंचाया. एसके गौतम, तत्कालीन उपयंत्री- बाणसागर बांध का निर्माण पूरा होने के बाद एनर्जी डिसीपेशन अरेंजमेंट सुधार का कार्य निर्माण एजेंसी से ही कराया जाना था. अलग प्राक्लन तैयार कर कार्य कराया. शासन की राशि बिना किसी मूल वजह से खर्च कराई, जिससे आर्थिक नुकसान हुआ. महेश प्रसाद शर्मा, सहायक वर्ग एक- गंगा कछार कार्यालय में पदस्थ रहते हुए निविदा प्रकरणों के निराकरण का प्रस्तुतीकरण दायित्व सौंपा गया था. एनर्जी डिसीपेशन अरेंजमेंट की मरम्मत के नाम पर निविदा तैयार कराने और शासन को 38.94 लाख रुपए का आर्थिक नुकसान कराने में सहभागी रहे.