ईओडब्ल्यू रीवा में नौ महीने से कोई मामला नहीं दर्ज हुआ

ईओडब्ल्यू रीवा में नौ महीने से कोई मामला नहीं दर्ज हुआ

पूर्व की शिकायतें लंबित, जांच कर भोपाल नहीं भेजी जा सकी. मामले दर्ज नहीं होने से लॉकडाउन के बाद से शिकायतों की संख्या भी घटी. कोरोना संक्रमण की वजह से हर क्षेत्र की व्यवस्थाएं बाधित हुई हैं. जिसका आर्थिक अनियमितता से जुड़े मामलों की जांच करने वाले राज्य आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की कार्रवाई पर भी असर पड़ा है. करीब नौ महीने का लंबा अंतराल बीतने के बाद अब तक ईओडब्ल्यू रीवा द्वारा अनियमितता से जुड़े मामलों का अपराध पंजीबद्ध नहीं किया जा सका है. लॉकडाउन मार्च महीने में प्रारंभ हुआ तब से शिकायत करने वालों की संख्या भी एक झटके में कम हो गई. साथ ही कार्यालय भी लंबे समय तक बंद रहा.  अनलॉक की प्रक्रिया प्रारंभ हुई तो कार्यालय खुलने लगा है लेकिन कार्रवाई की प्रक्रिया तेज नहीं हो सकी है. पूर्व के ही मामलों की विवेचना में विभाग उलझा हुआ है. रीवा कार्यालय में जिन मामलों की विवेचना की जाती है वह सभी मामले भोपाल के ईओडब्ल्यू थाने में दर्ज किए जाते हैं. आखिरी एफआईआर रीवा की 28 नवंबर 2019 को दर्ज की गई थी. इसके बाद कई जांच प्रतिवेदन भेजे जाने का दावा किया गया जा रहा है लेकिन इन पर एफआइआर दर्ज नहीं हो सकी है. पूर्व में मिली एक शिकायत पर जांच के बाद सीधी में ईओडल्यू रीवा के अधिकारियों की टीम चिटफंड कंपनी की जांच के लिए एक शिविर लगाया था. जहां पर शिकायतकर्ताओं से दस्तावेज लिए गए थे. बैंक घोटाले का दर्ज हुआ था आखिरी मामला ईओडब्ल्यू के आखिरी पंजीकृत अपराध में मध्यांचल ग्रामीण बैंक बंदरांव से जुड़ा मामला दर्ज किया गया था. जिसमें तत्कालीन शाखा प्रबंधक अमित कुमार वर्मा, बैंक का कार्यालय सहायक रामनिवास वर्मा एवं छत्रपति नगर निवासी महेन्द्र श्रीवास्तव के विरुद्ध धारा 409, 420 के तहत अपराध दर्ज किया गया है. आरोपियों ने ऋण स्वीकृति एवं वितरण के नाम पर 21.40 लाख रुपए की धोखाधड़ी की थी. कई शिकायतें वर्षों से जांच में बीते कुछ वर्षों से ईओडब्ल्यू रीवा में स्टाफ की भी समस्या बनी रही है, जिसकी वजह से विवेचना से जुड़े कार्य प्रभावित हुए हैं. इसी के चलते कई शिकायतें वर्षों से जांच में लंबित हैं. स्वास्थ्य विभाग के कई बड़े मामले हैं जिसमें सीएमएचओ सहित अन्य बड़े अधिकारी संदेह के दायरे में हैं. मेडिकल कालेज में दवा खरीदी के नाम पर भी व्यापक गड़बड़ी सामने आई है, इसकी भी जांच चल रही है. वहीं जिला पंचायत की एसजीआरवाय योजना के साथ ही शौंचालय निर्माण, जलसंरक्षण सहित अन्य कई योजनाओं की जांच चल रही है. वन विभाग और नगर निगम से जुड़ी कई अनियमितताओं की शिकायतें वर्षों से लंबित चल रही हैं. प्रदेश के सबसे बड़े आर्थिक घोटाले की जांच प्रभावित ईओडब्ल्यू रीवा के पास प्रदेश के सबसे बड़े आर्थिक अनियमितता के घोटाले में शामिल जलसंसाधन विभाग के बाणसागर परियोजना का घोटाला भी शामिल है. इसकी जांच करीब तीन वर्ष से प्रभावित है. विभाग के कई चीफ इंजीनियर और अधीक्षण यंत्री स्तर के अधिकारी आरोपी बनाए गए हैं. करीब सैकड़ा भर से अधिक फर्मों को चिन्हित किया गया है. अब तक की जांच में करीब दो सौ करोड़ रुपए से अधिक की जांच में अनियमितता का मामला सामने आया है. इसी तरह छात्रवृत्ति के नाम पर करोड़ों के घपले की जांच चल रही है. इसके अलावा राजस्व, शिक्षा, वन विभाग, पीडब्ल्यूडी, आजाक, पीएचई, नगर निगम सहित अन्य कई विभागों के मामलों की जांच भी लंबित है.