कैसे हुआ TRS कॉलेज में भ्रष्टाचार,अब हुआ खुलासा करोड़ों का हेरफेर,पूर्व प्राचार्य निलंबित|

कैसे हुआ TRS कॉलेज में भ्रष्टाचार,अब हुआ खुलासा करोड़ों का हेरफेर,पूर्व प्राचार्य निलंबित|

संभाग के सबसे बड़े महाविद्यालय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय में मध्यप्रदेश के शिक्षा के क्षेत्र का किसी महाविद्यालय का अब तक का सबसे बड़ा घोटला सामने आया है.जाँच के उच्च शिक्षा विभाग ने वित्तीय अनियमितिता में दोष पाए गये तत्कालीन प्राचार्य रामलला शुक्ला को निलंबित कर दिया है,वित्तीय अनियमितता मामले में हुए घोटाले में जाँच की जद में कई और जिम्मेदार आयेंगे जिनपर कार्यवाही होना तय है .पिछले 10 वर्षों मे महाविद्यालय की निधि का जिस तरह बंटाधार किया गया उससे कहीं न कही महाविद्यालय को बड़ी क्षति हुई है.  ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा की वित्तीय अनियमितता को देखकर आंखें पथरा गई है ।अब जाँच के बाद कार्यवाही का दौर शुरू हुआ है 28 अक्टूबर २०२० को उच्च शिक्षा विभाग से एक आदेश जारी हुआ लिखा गया की डॉ रामलला शुक्ला प्रभारी प्राचार्य शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय रीवा द्वारा अपनी पदस्थापना के दौरान महाविद्यालय में वित्तीय वर्ष 2018- 19 एवं 19-20 में गंभीर वित्तीय अनियमितता किया जाना पाया गया है प्रारंभिक जांच में रामलला शुक्ला द्वारा 14.0 9 करोड़ की वित्तीय अनियमितता कारित किया जाना प्रमाणित पाए जाने में राज्य शासन एतद् द्वारा डॉ राम लला शुक्ला प्रभारी प्राचार्य शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय रीवा को मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9(1) खा के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए मुख्यालय कार्यालय क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक सागर संभाग सागर नियत किया जाता हैवर्तमान प्रभारी प्राचार्य की शिकायत के बाद कलेक्टर ने एक जांच समिति का गठन किया था और उस समिति ने टीआरएस कॉलेज में हुए भ्रष्टाचार की वित्तीय अनियमितताओं की जांच की| महाविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराई गई कैशबुक का परीक्षण किया गया| कैशबुक में गोपनिय बंद लिफाफे के नाम से कई भुगतान किए गए| महाविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए गोपनीय बंद लिफाफा के परीक्षण में कुल 4 करोड़ 29 लाख 90 हजार 117 का भुगतान किया गया है।महाविद्यालय की लेखा शाखा द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार सत्र  2018-19 एवं 2019-20 मे आशीष गुप्ता मुट्ठीगंज इलाहाबाद को सत्र  2018-19 में एक करोड़ 98,26,424  राशि का भुगतान किया गया है और 2019-20 में दो करोड़ 31 लाख 63 हजार 746 राशि का भुगतान किया गया| यानी अब तक कुल चार करोड़ 29,90,170 रुपए गोपनीय बंद लिफाफे के माध्यम से आशीष गुप्ता मुट्ठीगंज इलाहाबाद को भुगतान की गई। बता दें कि बड़ी मात्रा में महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं अन्य लोगों को राशि का भुगतान किया गया और यह भुगतान मार्क्स फडिंग कोलेशन,  tabulation, AB संधारण फोटो कॉपी आदि के लिए किए गए जबकि मार्क्स फीडिंग, कोलेशन टेबुलेशन कार्य के लिए प्रथक से डाटा एंट्री ऑपरेटर कोलेटर एवं टेबुलेटर पहले से ही नियुक्त हैं। मतलब साफ़ है यह भी बड़ा गड़बड़ झाला चल रहा था| यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार 3 वर्ष तक ही एक प्राधिकारी को लगातार उक्त कार्य में लगाया जा सकता है जबकि यहां एक प्राधिकारी को कई वर्षों से नियुक्त किया गया था और वह महाविद्यालय में कार्य कर रहा था।जांच दल द्वारा पाया गया कि वार्षिक मानदेय देने की अलावा दिन प्रतिदिन के लिए अलग से उक्त प्राध्यापकों को एक बार से ज्यादा भुगतान किया गया जिसमें डॉ राम लला शुक्ला को एक करोड़ 39 लाख 85 हजार 769 राशि का भुगतान किया गया, यह चौंकाने वाली बात है कि तत्कालीन प्राचार्य का मानदेय उनके वेतन से 5 गुना अधिक  है। डॉ सत्येंद्र शर्मा को 14 लाख से ज्यादा की राशि का भुगतान हुआ डॉक्टर अभिलाषा गौतम को 3,31,501 राशि का भुगतान किया गया और ऐसे 15 नाम है जिन्हें एक बार से ज्यादा बार भुगतान हुआ है। इसके अलावा महाविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए कैश बुक एवं जांच में एंड बी भवन के पीछे दीवार में प्लास्टर कार्य हेतु कई बार एक ही दीवार के लिए राशि  दी गई| एक ही दीवार के लिए पांच बार भुगतान किया गया और यह राशि हर बार तीन लाख से ऊपर की थी।जांच समिति द्वारा की गई जांच में जो खुलासे हुए हैं उससे एक बात तो स्पष्ट है कि महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा अध्यापकों व वित्तीय शिक्षकों श्रमिकों के वेतन मानदेय के छात्रों की शुल्क राशि भागीदारी निधि से मानदेय और पारिश्रमिक के भुगतान को लाभ का शब्द बनाया गया। और अपने कार्यकाल में कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य ने 14 करोड़ नो लाख की भारी वित्तीय अनियमितता कारित की है। आयुक्त रीवा संभाग ने इस बंदरबांट में शामिल सारे शिक्षकों और पूर्व प्राचार्यों को नोटिस पकड़ा दिया था। इस नोटिस का जवाब लेकर उन्हें 14 और 15 अक्टूबर को कमिश्नर ऑफिस में तलब किया गया है। नोटिस मिलते ही शिक्षकों और इस पूरे मामले में शामिल जिम्मेदारों के जवाब देने में पसीने छूटने लगे.सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात यह है कि, दुनिया में कहीं भी छात्रों का परिचय पत्र बांटने के लिए पैसा नहीं लगता, लेकिन इस महाविद्यालय में लाखों रुपए परिचय पत्र बांटने में कमाया है। कर्मचारियों को भी प्रोग्रामर बनाकर  स्थापित कर दिया गया. यहीं भर नहीं कई जनभागीदारी और स्ववित्तीय  में रखे गए श्रमिकों को भी लाखों रुपए दिया गया ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय रीवा की यह वित्तीय अनियमितता की परत खुलनी शुरू हो गयी है उच्च शिक्षा ने 14 करोड़ से ज्यादा की अनियमितता में पूर्व प्राभारी प्राचार्य रामलला शुक्ला को निलंबित कर दिया है.जैसे-जैसे संभ्रांत लोगों तक यह बात पहुंच रही है उनको विश्वास ही नहीं हो रहा है कि इस तरह पैसे का बंदरबांट इस प्रतिष्ठित महाविद्यालय में हो रहा था । अगर यह पैसा महाविद्यालय में रहता तो आज  किसी स्ववित्तीय और जन भागीदारी के शिक्षकों  और कर्मचारीयों को वेतन देने के लाले न पड़ते। अब जाँच में जमकर बंदरबाट का खुलासा होने के बाद कार्यवाही का दौर शुरू है और विश्वास है की देर से ही सही लेकिन इन्साफ मिलना शुरु हुआ है.और यह इन्साफ रीवा के जन-जन का इंसाफ होगा.आरटीआई कार्यकर्त्ता बीके माला का कहना है की टीआरएस कॉलेज में वित्तीय अनियमितता और सुन्योजित भ्रसताचार  की जड़े बहुत गहरी हैं टीआरएस कॉलेज के पिछले 10 साल के वित्तीय मामलों की जाँच stf की करायी जानी चाहिए विद्यालय की 150वीं वर्षगांठ का मनाने का विवाद जिसमें  कमेटी द्वारा जांच की गई और पाया गया कि गलत तरीके से आयोजन किये जाने की तयारी चल रही थी . फिर कैशबुक में हेरफेर का विवाद उसकी भी जांच कराई गई और उस जांच में भी साफ हुआ कि बड़े व्यापक पैमाने पर वित्तीय अनिमिटता की गई मध्य प्रदेश का शायद यह पहला ही महाविद्यालय होगा जहां इतने बड़े व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया .लगभग 15 ऐसे शिक्षक-कर्मचारी हैं जिन्हें गलत तरीके से लाभ पहुचाया गया जो की जाँच के बाद सामने आ चूका है. गोपनीय बंद लिफाफे में भुगतान किया गया जिनका कोई हिसाब नहीं है UGC के नियमों और जनभागीदारी के नियमों को अनदेखा कर पैसों का हेर फेर किया गया. अलग-अलग तरीकों से वित्तीय अनिमिय्ताता कर संस्थान को क्षति पहुंचाई गई .जिस तरह से पैसों का बंदरबाट किया गया उससे कई बड़े विकास के कार्य किये जा सकते थे . अब दोषी पाए जाने के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन प्राचार्य डॉ राम लला शुक्ला को निलंबित किया है 14 करोड़ से ज्यादा की वित्तीय अनिमियायता मामले में उन्हें निलंबित किया गया है कुल मिलाकर तमाम जांचें चल रही है कई जांच पूरी हुई और अब कार्रवाई का दौर शुरू हुआ है ठाकुर महाविद्यालय को जिस तरह की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है वह दुखद है अब देखना होगा कि इस पूरे मसले पर आगे और कौन सी बड़ी कार्रवाई होती है क्योंकि अभी कई मामलों में जांच चल रही है और अब सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि टीआरएस के वित्तीय मामलों की एसटीएफ से जांच कराई जाए क्योंकि सास्थान में व्यापक पैमाने पर  भ्रष्टाचार हुआ है.