पीपल के पेड़ के नीचे छोटे-छोटे बच्चों के साथ क्वारंटाईन हुआ परिवार, पंचायत ने नहीं की कोई व्यवस्था

पीपल के पेड़ के नीचे छोटे-छोटे बच्चों के साथ क्वारंटाईन हुआ परिवार, पंचायत ने नहीं की कोई व्यवस्था

लाख प्रयास के बाद भी प्रशासन बाहर से आ रहे प्रवासी मजदूरों के लिए क्वारंटीन की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। पंचायतों की अनदेखी से लोग खुले आसमान के नीचे क्वारंटाईन हो रहे है। एक परिवार पीपल के पेड़ के नीचे छोटे-छोटे बच्चों के साथ क्वारंटाईन  है। दिन भर यह परिवार लू के थपेड़े सहता है। मामला त्योंथर तहसील के बरहा गांव है। त्योंथर तहसील के ग्राम पंचायत बरहा निवासी मंगल सिंह परिवार सहित पूणे महाराष्ट्र में मजदूरी करने गए थे| जहां वे 20 मई को बस के माध्यम से वापस लौटे और अपने घर आ गए। घर में उनके पास अलग कमरा नहीं था जिसमें वे क्वारंटाईन हो सके। वहीं पंचायत ने भी उनकी कोई व्यवस्था नहीं की। फलस्वरूप यह परिवार गांव में  ही पीपल के पेड़ के नीचे क्वारंटाईन हो गया। इनके साथ पत्नी व दो छोटे-छोटे बच्चे है। खुले आसमान के नीचे यह परिवार पिछले चार दिनों से पड़ा हुआ है जहां उनके लिए कोई व्यवस्था प्रशासनिक स्तर पर नहीं हो पाई है। गांव वालों से राशन मांग कर महिला खुद भोजन बनाती हैं और अपने परिवार का पेट भरती हैं। खाना बनाने के लिए प्रतिदिन महिला लकड़ियां भी बिन कर लाती है। यह दृश्य किसी के भी रोंगटे खड़े कर सकता है। दिन भर परिवार लू के थपेड़े सहता है। समीप ही स्थित नल में नहाकर पीने के लिए  पानी लाता है। वर्तमान में जिले के भीतर अधिकांश पंचायतों में ऐसे नजारे देखने को मिल जाते है जहां लोग घरों में व्यवस्था न होने से खुले आसमान के नीचे क्वारंटाईन है। हाल ही में टीकर, गोड़हर सहित अन्य गांव में इस तरह के मामले सामने आ चुके है| इसके बाद भी प्रशासन ऐसे परिवारों की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है जिनके पास क्वारंटीन होने की व्यवस्था नहीं है। सभी पंचायतों के स्कूल, पंचायत भवन सहित अन्य शासकीय बिल्डिंग खाली पड़ी है और उनमें ताले लटक रहे है लेकिन उसका लाभ ऐसे लोगों को नहीं मिल पा रहा है।