आम अनुसंधान केन्द्र में देशभर के मसहूर 123 प्रजातिओ के आमों का हो रहा नुकसान

आम अनुसंधान केन्द्र में देशभर के मसहूर 123 प्रजातिओ के आमों का हो रहा नुकसान

क्या आपको पता हैं की रीवा मे प्रदेश का सबसे बडा आम अनुसंधान केन्द्र मौजूद है जबाब हैं हा रीवा के कुठुलिया में आम अनुसंधान केन्द्र जहाँ देश के कोने-कोने की मसहूर सैकडों आम की प्रजातियाँ पाई जाती है। लेकिन इस बार कोरोना वायरस के चलते रीवा से दूर दराज रहने वाले लोगो को ये आम उपलब्ध नहीं हो पा रहे है| पहले ये जंहा देश विदेश में जाया करते थे वंही इस बार इन आमो को बाहर नहीं भेजा जा रहा हैं जिससे आम की खेती करने वालों को काफी नुकसान भी हो रहा है|

आम अनुसंधान केन्द्र कुठुलिया में देशभर के मसहूर 123 प्रजातिओ के आम पाये जाते है। इन सभी आमों की अपनी अलग-अलग खासियत है। आम के राजा सुन्दरजा को उसकी खूबसूरती के चलते सुन्दरजा नाम दिया गया तो मुगल सम्राट जहांगीर के नाम पर जहांगीर और उनकी बेगम का बेगम पंसद, खास ए खासुल, और ब्रिटिस वीके चांसलर के नाम पर एव्रिग नाम दिया गया है। वहीं कई राज महाराजाओ के नाम पर भी यहां आम के पेड मौजूद है जिसमे रीवा रियासत के महाराज मार्तण्ड सिंह, गुलाब सिंह के नाम पर गुलाब भोग मसहूर है। इतना ही नही विंध्य के मसहूर युद्ध के नाम पर चैसा प्रमुख है। इसके अलावा आम खास, दशहरी, बंगलोरा, आम्रपाली, सिंधु आपस, लगडा जैसे कई खास प्रजातियों के आम मौजूद है। लगभग 60 एकड मे फैला यह उद्यान प्रदेश का सबसे बडा आम अनुसंधान केन्द्र है यहां वैज्ञानिक परीक्षण कर आम की नई नसलें तैयार की जाती है जो देश के कोने कोने में अपने अपनी खासियत और मिठास के लिए मसहूर हुई है। सागौन के जंगल और तीनो ओर से नदी के घिरे होने के चलते कुठुलिया में आम की बेहतर प्रजातियां आसानी से तैयार होती है। प्रदेश का सबसे बडा अनुसंधान केंद्र होने से इसकी देखरेख करने में बहुत कठिनाईयां होती है। इस बार आम की पैदावार तो अच्छी हुई लेकिन पूरे विश्व मे फैले कोरोना वायरस का असर इन आमो की बिक्री पर भी पड़ा जो आम कभी देश विदेश में लोगों के मुंह का स्वाद बना करता था और उनकी काफी मांग होती थी वो इस बार बिक्री के लिए कंही बाहर नही जा पा रहे इन आमों से इसका धंधा करने वालों को काफी फायदा होता था लेकिन आम की अच्छी पैदावार होने के बाद भी किसानों के चेहरे मुरझाये हुए है कोरोना वायरस असर इनकी बिक्री पर काफी पड़ा जिसके चलते इन आमों की बिक्री यंही तक सिमट कर रह गई कभी जिन आमों की बिक्री कर किसान काफी मुनाफा कमाया करते थे उन्हें इस बार मार झेलनी पर रही है जिसके चलते उनके माँथो पर चिंता की लकीर साफ झलक रही है।