एम पी में नहीं लगेंगी छोटे बच्चों की कक्षाएं, स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा स्वास्थ्य विभाग नहीं है सहमत

एम पी में नहीं लगेंगी छोटे बच्चों की कक्षाएं, स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा स्वास्थ्य विभाग नहीं है सहमत

कोरोना वैक्सीनेशन का दूसरा चरण शुरू हो चुका है। इसके साथ ही नए केसों की संख्या में भी लगातार कमी आ रही है। यही वजह है, केंद्र सरकार ने 1 फरवरी को लागू कोविड गाइडलाइन में पूरी क्षमता के साथ सिनेमा हॉल खोलने की अनुमति भी दे दी है। उधर, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे बड़े राज्य जहां, संक्रमण ज्यादा फैला था, वहां 6 से 8वीं (मिडिल स्कूल) तक की कक्षाएं शुरू हो गई हैं, जबकि प्रदेश में अब तक यह शुुरू नहीं हो पाई हैं।

छोटे बच्चों की क्लास कब से लगना शुरू होंगी इस सवाल पर मप्र के स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा, राज्य में कोरोना संक्रमण नियंत्रण में है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने छोटे बच्चों के स्कूल खोले जाने पर सहमति नहीं दी है। शिक्षा विभाग अपने स्तर पर कोई निर्णय नहीं ले सकता। यह बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा संवदेनशील विषय है। जैसे ही, स्वास्थ्य विभाग की सहमति मिलेगी, मिडिल और प्राइमरी स्कूल खोलने को लेकर विचार किया जाएगा।

बता दें, मध्य प्रदेश में 5 दिसंबर 2020 को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी। इसमें निर्णय लिया गया था कि कक्षा 1 से 8वीं तक की कक्षाएं 31 मार्च तक बंद रहेंगी। इसके बाद सरकार ने कोरोना की स्थिति के मद्देनजर पूर्व में लिए निर्णय पर पुनर्विचार तक नहीं किया। आंध्र प्रदेश और पंजाब में कुछ शर्तों के साथ प्राइमरी (1 से 5वीं) की कक्षाएं नियमित लगना शुरू कर दी गई हैं, जबकि दिल्ली सरकार तो नर्सरी के स्कूल खोलने पर विचार कर रही है।

मप्र में कोरोना संक्रमण के आंकड़े देखें, तो सरकार ने जब (4 दिसंबर) को प्राइमरी व मिडिल स्कूल नए सत्र 1 अप्रैल से शुरू करने का फैसला लिया था, तब प्रतिदिन 1300 से अधिक केस सामने आ रहे थे। प्रदेश में ​​एक दिन में औसतन 13 मौतें हो रहीं थी, लेकिन 8 फरवरी को कोरोना के केस घट कर 190 हो गए हैं, जबकि जिन राज्यों में स्कूल खोले गए हैं, वहां एक्टिव केस मप्र से ज्यादा हैं। आरोग्य सेतु एप के मुताबिक महाराष्ट्र में 37, 212 और पंजाब में 2176 एक्टिव केस हैं, जबकि मप्र में यह आकंडा 2041 है।