राजस्थान सरकार ने SC में रखा पक्ष, आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ाना चाहते हैं राज्य

राजस्थान सरकार ने SC में रखा पक्ष, आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से ज्यादा बढ़ाना चाहते हैं राज्य

महाराष्ट्र के मराठा समुदाय के आरक्षण (Maratha Reservation) मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण की 50 फीसदी की तय सीमा में बदलाव को लेकर राज्यों से राय मांगी थी. मंगलवार को इस मामले पर राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा. सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार ने कहा कि 50 प्रतिशत की सीमा पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है.

राजस्थान सरकार के वकील मनीष सिंघवी ने कहा है कि राज्य में आबादी बढ़ी है इस लिहाज से ज्यादा आबादी को मुख्य धारा में लाने के लिए इस सीमा को बढ़ाना जरूरी है. राजस्थान सरकार ने कहा कि इंदिरा साहनी के फैसले पर विचार करना बेहद जरूरी है क्योंकि ऐसा करने से राज्य सरकार की वेलफेयर स्कीम अधिक लोगों तक पहुंच सकती है.

राजस्थान सरकार ने कहा कि राज्य में पिछड़ेपन का मापदंड तय करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है न कि केंद्र सरकार के पास है. किसी भी राज्य में सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े वर्ग का मापदंड तय करना पूरी तरीके से उस राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है. इसी के तहत राज्य सरकार को अधिकार है कि वो अपने यहां दिए जाने वाले आरक्षण की सीमा तय करे.

यहां तक इंदिरा साहनी के फैसले में भी दूर दराज के इलाके में रहने वाले लोगों के लिए आरक्षण की अधिकतम सीमा बढ़ाकर आरक्षण दिए जाने का अपवाद भी रखा है. लिहाजा 50 प्रतिशत की आरक्षण की सीमा को बढ़ाया नहीं जा सकता है ऐसा कहना गलत है.