कोरोना संकट के बीच बाघों के प्रजातियों पर संकट का गहरा साया

कोरोना संकट के बीच बाघों के प्रजातियों पर संकट का गहरा साया

मौजूदा समय में देश और दुनिया में एकमात्र कोरोनावायरस का खतरा मंडरा रहा है इस वायरस ने दुनिया के सुपर पावर देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया हैं और वो सभी देश इस वायरस की पीड़ा से कराह रहे हैं तो वहीं मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस के संकट के बीच बाघों पर भी खतरा मंडरा रहा है बता दे कि बांधव गढ़ टाइगर रिजर्व में अभी हाल ही में एक और बाघ की मौत हो गई  तो वहीं यदि बाघों की मौत का आंकड़ा देखा जाए तो 1 महीने में 9 बाघों की जान चली गई| वन्य जीव एवं भारत एवं प्रदेश के धरोहर इन बाघों की मौत कहीं न कहीं खतरे की निशानी इतना ही नहीं लॉकडाउन के दौरान हुई बाघों की मौत में कई बाघों के शव सड़े गले हालत में मिले, तो वही अब तक बाघों की मौत के आंकड़े की बात की जाए तो 1 अप्रैल को कान्हा किसली में  एक बाघ की मौत हो गई और उसके 2 दिन बाद ही 3 अप्रैल को पेंच में एक बाघ की मौत हुई फिर उसके बाद 9 अप्रैल को बांधवगढ़ में एक बाघ की मौत हुई, 11 अप्रैल को बुरहानपुर में 13 अप्रैल को एक बार फिर कान्हा किसली में एक और बाघ की मौत हो गई और फिर 17 अप्रैल को चित्रकूट में 22 अप्रैल को बांधवगढ़ में और इसी 22 को एक और बाघ की मौत रीवा के नजदीकी मुकुंदपुर टाइगर सफारी में हो गई और 2 मई को एक बार फिर बांधवगढ़ में 1 बाघ की  मौत हो गई कहीं न कहीं इन बाघों की मौत से ऐसा लगने लगा है कि बाघों के प्रजातियों पर खतरा मंडरा रहा है जहां एक और पूरा विश्व कोरोना से जंग लड़ने में जुटा हुआ है तो वहीं यह वन्य जीव जो भारत के धरोहर हैं वह अपनी जान गवा रहे हैं