भेड़ बकरियों की तरह एक ही गाड़ी में भरे जा रहे मजदूर, शासन के दावों की खुलती पोल

भेड़ बकरियों की तरह एक ही गाड़ी में भरे जा रहे मजदूर, शासन के दावों की खुलती पोल

गाड़ियों में भेड़ बकरियों की तरह भरकर बाहर से मजदूर व श्रमिक लाये जा रहे है और शासन अपना सीना चौड़ा करके  यह वाहवाही लूटने में लगा है कि  हम अपने देश के लोगों को  उनके घर तक पहुंचाने के लिए वचनबद्ध है  और उन्हें अपने घर तक लाकर ही छोड़ेंगे|  वहीं प्रशासनिक अधिकारी  यह कहते नजर आ रहे हैं कि वह गरीबों की हर संभव मदद कर रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है|

भेड़ बकरियों की तरह वाहनों में भरकर नगर के एक स्कूल के मैदान पर एक तरह से जानवरों के जैसे बंधक बनाए गए लोगों को रखा गया| इसके बाद उसी तरह वाहनों में भरकर अस्पताल भेजकर उनके मेडिकल चेक अप के नाम पर महज टेंपरेचर नापा जा रहा है| इस पर भी  बड़ी बात यह है कि  इस तेज धूप में 2 दिन से भूखे खड़े  मजदूर व उनके बच्चे  भूख और प्यास से बिलख रहे हैं |  जो आप तस्वीरों में देख कर ही समझ जाएंगे| वहीं अस्पताल से चिकित्सक नदारद है  या फिर अपने ऐसी रूम में बैठकर आराम फरमा रहे है|  2 वार्ड बॉय लोगों की पर्चियां काटते नजर आए बड़ी बात तो यह है कि शासन जहां गरीबों की मदद करने की बात कह रहा है वही गरीब यह कह रहा है कि 22 से 25 सौ रुपए देकर वह गुजरात से रीवा पहुंचे हैं कुछ से तो ₹35सौ रुपए तक लिए गए इसके बाद ही इन्हें एक मैदान पर छोड़ दिया गया| जहां ना खाने पीने की व्यवस्था ना ही आराम करने की| गुजरात से चलने से अभी तक इन्हें मात्र तो एक बार भोजन उपलब्ध कराया गया है|  पिछले 2 दिन से यह भूखे प्यासे और अब इनसे छुटकारा पाकर अपने घर जाना चाहते हैं|  बड़ी-बड़ी बातें करने वाले प्रशासनिक अधिकारी  अब सामने आने से कतरा रहे है| आपको बता दें कि गुजरात में  कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा संक्रमित लोग है| इसके बाद भी इन लोगों को महज टेंपरेचर नाप कर छोड़ा जाना कहां तक उचित है|