घर पहुँचने की आस में पैदल चले मजदूर दुनिया को कह गए अलविदा

घर पहुँचने की आस में पैदल चले मजदूर दुनिया को कह गए अलविदा
 

मजबूरी ही रही होगी कोई पैदल चला होगा

मजबूरी ही रही होगी जो ट्रेन की पटरी पर लेटा होगा

ट्रेन के रफ्तार में कट गए उन मजदूरों के धड़

मजबूरी ही रही होगी कोई जो घर को चला होगा

मजदूर जो देश को अपनी मेहनत से विकसित बनाते है ये वही मजदूर हैं जोअपनी मेहनत से घर से लेकर सड़क सब कुछ बनाते है| और वही मजदूर आज हजारों मील पैदल चलने के लिए मजबूर है| जीते जी उस मजदूर के लिए कोई संवेदना नहीं है बात कर रहे हैं फिर से औरंगाबाद रेल हादसे की जहां शहडोल और उमरिया के मजदूरों की जान चली गई उमरिया के अंतौली और ममान गांव के वही मजदूर जीनके धड़ मालगाड़ी की चपेट में आने से अलगहो गए जीते जी तो उन्हें वापस नहीं लाया गया लेकिन हादसे में हुई मौत के बाद उनके शव को बकायदा इंतजाम करके लाया गया और उनके मातम में तमाम अफसर नुमा अधिकारियों के साथ-साथ इलाकाई छोटे-बड़े नेता पहुंचे हर किसी ने हर संभव मदद की बात कही| सरकार ने फिर वही खेल दोहराया और मुआवजा से मृतकों के शव को तौल दिया| लेकिन इस हादसे में किसी ने अपना बेटा खोया तो किसी ने अपना पति खो दिया| किसी ने अपना भाई  तो किसी ने अपने पिता को खोया.....

 8 मई 2020 शुक्रवार का दिन महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मालगाड़ी की चपेट में आने से प्रदेश के 16 मजदूरों का धड़ छड़ भर में अलग हो गया, गरीबी कब और कहां किसको ले जाए इस रेल हादसे की खबर को सुनकर एवं देखकर आप एहसास कर सकते हैं, पत्नी की छलकते आंसू मां-बाप को जवान बेटे को खोने का गम जिंदगी भरवो गरीब परिवार ऐसे तो नहीं भूलेगा जिसके घर का चिराग  मजबूरी में मौत के भेंट चढ़ गया|  हादसे  के शिकार हुए मृतक मजदूरों के घर में परिजनों को जब इसकी खबर लगी तभी से पूरा परिवार बदहवासी में झुलस गया| उम्मीद थी कि वह अपने खून को देख सकेगा लेकिन वह भी नसीब नहीं हुआ रेल की पटरी में बिखरा हुआ शव जिसे समेट कर उनके गांव में वापस लाया गया|  मजदूर जब जिंदा थे महाराष्ट्र के औरंगाबाद से पैदल ही अपने प्रदेश में आने के लिए मजबूर थे| लेकिन उनके मरने के बाद सरकार ने ऐसी दरियादिली दिखाई जिसे हर कोई याद रखेगा|  उनके शव को वापस गृह ग्राम में लाने के लिए स्पेशल ट्रेन भेजी गई| अधिकारियों का एक दल बचे हुए मजदूरों के उपचार कराने के लिए एवं शव को वापस लाने के लिए भेजा गया| औरंगाबाद से शव को लेकर जब ट्रेन की वापसी उमरिया में हुई चारों ओर खामोशी छा गई|  सभी ने दुख व्यक्त किया गांव का माहौल गमगीन था मजदूरों के शव को देखने के बाद घर की महिलाएं रोते-रोते अचेत हुए जा रही थी|  मजदूरों के अंतिम संस्कार में संभाग एवं जिले के प्रशासनिक अधिकारी भी पहुंचे। रीवा संभाग के संभागायुक्त और शहडोल के प्रभारी संभागायुक्त अशोक भार्गव, कलेक्टर डॉ सत्येंद्र सिंह एवं पुलिस अधीक्षक सत्येंद्र कुमार शुक्ल ग्राम अतौली एवं ममान औरंगाबाद ट्रेन हादसे में मृतक लोगों के घरों में पहुंचकर उनके परिजनों को ढांढस बंधाया और ईश्वर से इन्हें दुख को सहन करने की शक्ति  देने की प्रार्थना की। सभी ने दुख जताया मौके पर ब्यौहारी विधायक शरद कोल, सीईओ जिला पंचायत पार्थ जयसवाल, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व श्रीमती पूजा मिश्रा, तमाम इलाकाई नेता और वह सभी अफसर नुमा अधिकारी उनके जनाजे में पहुंचे, सरकार के द्वारा दी जाने वाली मुआवजा की राशि के बारे में परिजनों को अवगत कराया लेकिन मुआवजा की राशि कितनी भी हो किसी भी मृत को जिंदा नहीं कर सकती| जिस तरह से औरंगाबाद में एक पटरी पर 16 जिंदगियां सिमट गई थी उससे हर कोई विचलित था|मृतक मजदूरों के परिजनों को जब प्रशासन ने सरकार का फरमान सुनाया कि सरकार ने उन्हें मुआवजा के रूप में मोटी रकम देगी और  परिवार का ध्यान भी रखा जाएगा  लेकिन परिजनों ने रोते हुए कहा साहब रूपए पैसे नहीं जीने का सहारा चाहिए जो हमसे छीन गया| इस दौरान सभी की आंखें नम हुई अंतिम संस्कार कराया गया और वो मजदूर जो अपने गांव से दूर रोजगार के लिए गए थे वे अपने घर, गांव,के साथ-साथ दुनिया को अलविदा कह गए।